जतेन्द्र शर्मा # श्रीगंगानगर। प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना और पीएम कुसुम योजना के सफल क्रियान्वयन से श्रीगंगानगर जिला अब बिजली उत्पादन के मामले में ‘आत्मनिर्भर’ बनने की राह पर तेजी से अग्रसर है। जिले के 17,200 उपभोक्ताओं ने अपने घरों और संस्थानों की छतों पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली का उत्पादन कर सूरज की रोशनी से अपनी दुनिया रोशन कर ली है। जिले के उपभोक्ताओं की छतों पर लगे इन सोलर प्लांटों की कुल क्षमता लगभग 58 हजार किलोवॉट तक पहुँच गई है। इससे प्रतिदिन 2 लाख से अधिक यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसका सीधा असर बिजली ग्रिड पर भी पड़ा है; संबंधित सब-डिवीजनों में लोड काफी कम हुआ है, जिससे सिस्टम की दक्षता बढ़ी है। सब्सिडी का ‘डबल इंजन’ लाभ: 95,000 तक की बचत डिस्कॉम अधिकारियों के अनुसार सोलर अपनाने के पीछे सरकार की भारी सब्सिडी मुख्य कारण है। इसके तहत 3 किलोवाट प्लांट पर केंद्र सरकार 78,000 और राज्य सरकार 17,000 की अतिरिक्त सब्सिडी दे रही है। ऐसे में पात्र उपभोक्ताओं को कुल 95,000 तक की छूट मिल रही है। इसके अलावा 1 किलोवाट पर 30,000 और 2 किलोवाट पर 60,000 की सब्सिडी का प्रावधान है। सोलर प्लांट लगने से उपभोक्ताओं के साथ किसानों को भी बड़ा लाभ मिल रहा है। जीएसएस पर लोड कम होने के कारण अब किसानों को सिंचाई के लिए दिन के समय पर्याप्त बिजली मिल रही है। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी आने से पर्यावरण संरक्षण में भी यह एक बड़ा कदम साबित हो रहा है। प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत जिले में भी शानदार प्रगति हुई है। एनटीपीसी द्वारा जैतसर में स्थापित 160 मेगावाट का प्लांट संभाग का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा केंद्र है। इसके अलावा कुसुम कंपोनेंट ए योजना में 92 प्रोजेक्ट में से 11 प्लांट स्थापित किए जा चुके हैं जिनसे 14 मेगावाट उत्पादन हो रहा है। वहीं फीडर लेवल सोलराइजेशन फेज द्वितीय व तृतीय में 57 में से 11 प्लांट स्थापित हो चुके हैं जिनसे 24 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है।
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