पदमपुर ,तहसील क्षेत्र में गुरुवार को हुई मूसलाधार बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंताओं को और बढ़ा दिया। जहां एक ओर प्राकृतिक आपदा ने फसलों को नुकसान पहुंचाया, वहीं दूसरी ओर कृषि उपज मंडी समिति की लचर व्यवस्थाओं के कारण मंडी में रखी फसलें भीग गईं। किसानों का आरोप है कि मौसम विभाग की चेतावनी के बावजूद मंडी प्रशासन ने शेड खाली नहीं करवाए। किसानों ने चार दिन पहले ही संभावित बारिश को देखते हुए शेड खाली कराने की मांग की थी, लेकिन इसे नजरअंदाज कर दिया गया। नतीजतन तेज बारिश में किसानों की मेहनत से तैयार की गई फसल खराब हो गई और भारी नुकसान हुआ। किसान नेता सुखबीर सिंह फौजी के नेतृत्व में आक्रोशित किसानों ने मंडी समिति कार्यालय का घेराव किया। किसानों ने बताया कि मंडी के शेड किसानों की उपज को सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए हैं, लेकिन वास्तव में व्यापारियों की खरीदी हुई उपज शेड के नीचे सुरक्षित रखी जाती है, जबकि किसानों की फसल खुले में पड़ी रहती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ए ग्रेड मंडी होने के बावजूद यहां की हालत बेहद खराब है। सड़कों पर गड्ढे, जलभराव और अव्यवस्थाओं के कारण मामूली बारिश में ही हालात बिगड़ जाते हैं, जिससे किसान, मजदूर और व्यापारी वर्ग को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि मंडी समिति की अतिरिक्त सचिव लीला मीणा ने बारिश से प्रभावित फसलों की खरीद का आश्वासन दिया, जिसके बाद किसानों ने फिलहाल राहत की सांस ली। वहीं आसपास के गांवों में हुई ओलावृष्टि को भी फसलों के लिए नुकसानदायक बताया जा रहा है।गजसिंहपुर मंडी में पड़ी फसलें भीगी। गजसिंहपुर कस्बे क्षेत्र में दोपहर बाद अचानक हुई बारिश ने मंडी यार्ड में पड़ी कृषि जिंस को भिगो दिया, जिससे किसानों और व्यापारियों को भारी नुकसान की आशंका है। उठाव नहीं होने के कारण खुले में रखी जिंस पानी में भीग गई। स्थिति संभालने के लिए मजदूरों ने तिरपाल से ढककर जिंस को बचाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक काफी माल प्रभावित हो चुका था। वहीं आज बोली नहीं होने से किसानों और व्यापारियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी रही। बताया जा रहा है कि ट्रकों की कमी के चलते न तो समय पर उठाव हो पा रहा है और न ही आवक व बोली की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल पा रही है, जिससे मंडी व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इधर बारिश का असर खेतों में खड़ी पकी फसलों पर भी पड़ा है।
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