क्षेत्र में पदमपुर–गंगानगर हाईवे पर स्थित टोल नाकों को लेकर सोमवार को माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया। जिला प्रशासन के निर्देश पर पुलिस विभाग ने भारी दल-बल के साथ कार्रवाई करते हुए पहले 9 ए टोल नाके को शुरू करवाया और इसके बाद 18 बीबी टोल नाका चालू कराने की कोशिश की। टोल हटाओ संघर्ष समिति के आंदोलनकारियों को हटाने के लिए कई थानों की पुलिस और उच्च अधिकारियों की टीमें मौके पर पहुंचीं। इस दौरान समिति के संयोजक सुखबीर सिंह फौजी, राजकुमार सहित करीब एक दर्जन आंदोलनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में आंदोलनकारी मौके पर जुट गए। अंबेडकर जयंती पर भी तय था कार्यक्रम: आंदोलनकारियों ने आरोप लगाया कि 15 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती पर 18 बीबी टोल नाके पर आयोजित होने वाले बड़े कार्यक्रम को रोकने और आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की गई है।उच्च न्यायालय ने भी संज्ञान लेते हुए पुलिस अधीक्षक से 15 अप्रैल तक जवाब मांगा है। इससे पहले जिला प्रशासन, पुलिस विभाग और पीडब्ल्यूडी विभाग के बीच कई दौर की वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया। आंदोलनकारियों का आरोप है कि पीडब्ल्यूडी विभाग टोल वसूली के समर्थन में ठोस दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाया है। किसान नेता हरविंदर सिंह डेलवा ने 9 ए टोल नाके पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वहां नियमों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने बताया कि टोल वसूली के दौरान जब दीपक एंड कंपनी की रसीद मांगी गई तो कर्मचारियों ने किसी अन्य व्यक्ति के स्कैनर से भुगतान करवाने की कोशिश की, जिस पर आपत्ति जताई गई।विधायक रूपिंद्र कुन्नर सहित अन्य लोगों को पुलिसकर्मी बसों में ले गए। घटनास्थल पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष और श्रीकरणपुर विधायक रूपिंद्र सिंह कुन्नर भी पहुंचे और उन्होंने पुलिस प्रशासन पर संरक्षण देकर टोल को जबरन शुरू कराने का आरोप लगाया। विधायक ने टोल बूथ पर ही धरना दे दिया। इस पर पुलिस विधायक कुन्नर सहित अन्य को वाहनों में साथ ले गई, हालांकि उन्हें 25 बीबी पर छोड़ दिया गया। विधायक ने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे आंदोलनकारियों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई दुर्भाग्यपूर्ण है। यह पूरी कार्रवाई माहौल बिगाड़ने की सोची-समझी साजिश है और जनता इसका जवाब देगी। वक्ताओं ने इसे निंदनीय बताते हुए कहा कि जनहित में शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे लोगों को निशाना बनाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
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