सीमा सन्देश # हनुमानगढ़। गेहूं खरीद व्यवस्था में आ रही तकनीकी खामियों और जटिल प्रक्रियाओं के विरोध में सोमवार को जिला मुख्यालय पर महापड़ाव देखने को मिला। किसान, मजदूर और व्यापारियों के संयुक्त आह्वान पर लोग कलेक्टरेट पहुंचे और पूरे दिन प्रदर्शन किया। सुबह से शुरू हुआ यह आंदोलन शाम तक जारी रहा, जिससे प्रशासनिक अमला भी सक्रिय हो गया। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टरेट परिसर के बाहर डेरा डालते हुए अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी की और सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया। किसानों का कहना था कि गेहूं खरीद की वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह अव्यवस्थित है, जिससे उन्हें अपनी उपज बेचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं व्यापारियों और मजदूरों ने भी इस व्यवस्था को अव्यवहारिक बताते हुए तत्काल सुधार की मांग की। दिनभर चले इस महापड़ाव के दौरान प्रशासन और किसान-मजदूर-व्यापारी प्रतिनिधियों के बीच दो दौर की वार्ता आयोजित की गई। पहले दौर की वार्ता किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी, जिससे प्रदर्शनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई। इसके बाद दूसरे दौर की वार्ता शुरू हुई, जिसमें जिला कलेक्टर की मध्यस्थता में प्रतिनिधिमंडल की सरकार के प्रतिनिधियों के साथ वीसी के माध्यम से चर्चा करवाई गई।दूसरे दौर की वार्ता में कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सहमति बनी। व्यापारियों की प्रमुख मांग को स्वीकार करते हुए यह निर्णय लिया गया कि किसानों की बायोमैट्रिक प्रणाली में जन आधार से जुड़े किसी भी परिवार सदस्य के फिंगरप्रिंट को मान्य किया जाएगा। इससे उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो तकनीकी कारणों से स्वयं बायोमैट्रिक सत्यापन नहीं करवा पा रहे थे। इसके साथ ही बारदाने (बोरी) की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया गया, ताकि खरीद प्रक्रिया में किसी प्रकार की बाधा न आए। पोर्टल में आ रही तकनीकी शिकायतों के समाधान को लेकर भी प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि सभी समस्याओं का निस्तारण मंगलवार तक कर दिया जाएगा। इन सभी बिंदुओं की समीक्षा के लिए 16 अप्रैल को पुनः बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। देर शाम करीब 5 बजे दूसरे दौर की वार्ता समाप्त होने के बाद व्यापारी, किसान और मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच आपसी सहमति बनी। इसके बाद मंच से घोषणा की गई कि फिलहाल आंदोलन को स्थगित रखते हुए प्रशासन को निर्धारित समय दिया जा रहा है, लेकिन यदि 16 अप्रैल तक समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो 17 अप्रैल से पुनः तंबू गाड़कर बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा और इसे और तेज किया जाएगा।
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