हनुमान जयंती आज : जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि

Hanuman Jayanti

सीमा सन्देश # श्रीगंगानगर। हिंदू धर्म के अत्यंत पावन पर्व हनुमान जयंती को लेकर इस वर्ष भक्तों में भारी उत्साह है। भगवान हनुमान के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाने वाला यह पर्व गुरुवार को मनाया जा रहा है। इस बार का संयोग इसलिए भी विशेष है क्योंकि गुरुवार का दिन देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु का माना जाता है, जिससे बजरंगबली की पूजा का फल दोगुना हो जाएगा।

शुभ मुहूर्त और तिथि का गणित: शास्त्रों के अनुसार, चैत्र मास की पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल को प्रात: 7:06 बजे प्रारंभ होगी और 2 अप्रैल को प्रात: 7:41 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के नियमानुसार, हनुमान जयंती 2 अप्रैल को ही है। पूजा का सबसे पुण्यकारी समय प्रात: 6:11 से 7:41 के बीच रहेगा, जब सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि विद्यमान होगी। इसके अतिरिक्त, सायंकाल की पूजा के लिए शाम 6:30 से रात 8:00 बजे तक का समय श्रेष्ठ बताया गया है।

घर पर कैसे करें पूजन?: भक्तों की सुविधा के लिए ज्योतिषाचार्यों ने सरल पूजन विधि साझा की है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त (प्रात: 4:35 से 5:23) में उठकर स्नान के पश्चात लाल या नारंगी वस्त्र धारण करना शुभ होता है। घर के मंदिर में हनुमान जी की प्रतिमा के सम्मुख घी या सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें। हनुमान जी को सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करना अत्यंत प्रिय है। नैवेद्य में बेसन के लड्डू, बूंदी, गुड़-चना और विशेष रूप से तुलसी दल युक्त भोग लगाना चाहिए। मान्यता है कि बिना तुलसी के हनुमान जी भोग स्वीकार नहीं करते।

मंत्र और पाठ का महत्व: इस विशेष दिन पर हनुमान चालीसा का सात बार पाठ करना संकटों से मुक्ति दिलाता है। इसके अतिरिक्त, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ मानसिक शक्ति और सुरक्षा प्रदान करता है। जो भक्त मंत्र जाप करना चाहते हैं, वे “ॐ हं हनुमते नमः” या हनुमान गायत्री मंत्र का 108 बार जाप कर सकते हैं।

व्रत के नियम और सावधानी: हनुमान जयंती का व्रत रखने वाले जातकों को पूर्ण ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। व्रत के दौरान सात्विक आहार जैसे फल, दूध और साबूदाना लिया जा सकता है। पूजा में इस बात का विशेष ध्यान रखें कि चरणामृत या पंचामृत का अभिषेक करने के बाद हनुमान जी को शुद्ध जल से स्नान अवश्य कराएं। हनुमान जी शक्ति, बुद्धि और अटूट भक्ति के प्रतीक हैं। श्रद्धापूर्वक की गई उनकी आराधना से न केवल शनि दोष का प्रभाव कम होता है, बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। याद रखें, हनुमान जी को विधि-विधान से अधिक भक्त का सच्चा भाव प्रिय होता है।

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