2 एकड़ में डेयरी, पोल्ट्री और बकरी पालन से बनाया सफल मॉडल

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पंजाब में लंबे समय से खेती गेहूं–धान के चक्र पर आधारित रही है, लेकिन घटती जमीन, बढ़ती लागत और बदलते मौसम के कारण यह खेती छोटे किसानों के लिए अब मुश्किल होती जा रही है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ किसानों को खेती के साथ-साथ अन्य व्यवसाय अपनाने की सलाह दे रहे हैं। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को डेयरी, पोल्ट्री, बकरी पालन, मछली पालन और मधुमक्खी पालन जैसे विकल्प अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इसी बदलाव को अपनाकर गुरदासपुर जिले के अबालखैर गांव के किसान गुरनाम सिंह ने सफलता की नई मिसाल पेश की है। केवल 2 एकड़ जमीन होने के बावजूद उन्होंने पारंपरिक खेती छोड़कर इंटीग्रेटेड फार्मिंग (मिश्रित खेती) को अपनाया। गुरनाम सिंह ने 2016 में केवीके गुरदासपुर से प्रशिक्षण लिया और 2017-18 में डेयरी फार्मिंग शुरू की। आज उनके पास 26 पशु हैं, जिनमें मुर्रा भैंस, बछियां और बछड़े शामिल हैं। उनका फार्म रोजाना 1.2 से 1.3 क्विंटल दूध उत्पादन करता है, जिसे वे सीधे ग्राहकों को 50-55 रुपये प्रति लीटर में बेचते हैं। उन्होंने पशुओं के लिए खुले और साफ शेड बनाए हैं, जिनमें पंखे, कूलर और पानी की अच्छी व्यवस्था है। वे खुद पशुओं का चारा तैयार करते हैं, जिससे लागत कम होती है और गुणवत्ता बनी रहती है। डेयरी के साथ-साथ वे 150 देसी मुर्गियों का पालन भी कर रहे हैं, जिनका मांस ब्रॉयलर से दोगुनी कीमत पर बिकता है और अंडे गर्मियों में 8-10 रुपये तथा सर्दियों में 13-15 रुपये तक बिकते हैं। केवीके विशेषज्ञों के अनुसार छोटे किसानों के लिए खेती में विविधता अपनाना जरूरी है। गुरनाम सिंह का मॉडल दिखाता है कि डेयरी, पोल्ट्री और बकरी पालन को साथ मिलाकर स्थिर आय प्राप्त की जा सकती है। हाल ही में उन्होंने 12 बीटल नस्ल की बकरियां भी फार्म में शामिल की हैं, जिससे आय के स्रोत और बढ़ गए हैं। उनकी मेहनत और नवाचार के लिए उन्हें 2023 में किसान मेले में प्रगतिशील किसान पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

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