सीमा सन्देश | श्रीगंगानगर
जिले में जरूरतमंद और अभावग्रस्त विद्यार्थियों की मदद के लिए सक्रिय संस्था मां सरस्वती पुस्तक बैंक ने एक अनूठा नवाचार किया है। संस्था ने शहर के सभी स्कूलों में “एजुकेशन झोपड़ी” स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिसका उद्देश्य शिक्षा सामग्री की बर्बादी रोकना और उसे जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाना है।
एजुकेशन झोपड़ी क्या है और कैसे करेगी काम?
एजुकेशन झोपड़ी भारी लोहे के एंगल से निर्मित एक स्थायी ढांचा है। स्कूलों में इसके स्थापित होने के बाद विद्यार्थी अपनी पुरानी किताबें, स्कूल बैग, नोटबुक और ड्रेस इसमें जमा कर सकेंगे। इसका उद्देश्य छात्रों में दान की प्रवृत्ति विकसित करना और संसाधनों का पुनः उपयोग सुनिश्चित करना है। जमा की गई सामग्री को बाद में संस्था द्वारा निकालकर पुस्तक बैंक ले जाया जाएगा, जहां से इन्हें जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क वितरित किया जाएगा।
गुड शेफर्ड स्कूल से हुई शुरुआत
इस नवाचार की शुरुआत शहर के गुड शेफर्ड स्कूल से की गई, जहां पहली एजुकेशन झोपड़ी स्थापित की गई। इसका विधिवत उद्घाटन मां सरस्वती पुस्तक बैंक के सदस्यों और शहर के गणमान्य नागरिकों ने किया।
मूमल गैस का सहयोग
गुड शेफर्ड स्कूल में स्थापित यह पहली झोपड़ी मूमल गैस के विशेष सहयोग से उपलब्ध करवाई गई है। संस्था का लक्ष्य है कि आने वाले समय में शहर के हर स्कूल में ऐसी झोपड़ी स्थापित की जाए, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे। कार्यक्रम में ये रहे उपस्थित- उद्घाटन के अवसर पर संस्था के कई पदाधिकारी और अतिथि मौजूद रहे। संस्था की ओर से अध्यक्ष शरद जसूजा, संरक्षक रवि कटारिया, वरिष्ठ सलाहकार राजीव मिढ़ा और उपाध्यक्ष मृदुल कामरा उपस्थित रहे। वहीं अतिथियों में प्रख्यात समाजसेवी डॉ. शैलेश गोयल, गुड शेफर्ड स्कूल के डायरेक्टर मानव चिमनी और मूमल गैस से संजय मित्तल शामिल रहे। संस्था के इस कदम की शिक्षा जगत और आमजन द्वारा सराहना की जा रही है, क्योंकि यह न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिए पुस्तकों के पुनः उपयोग की दिशा में बड़ा कदम है, बल्कि सामाजिक सरोकार की एक बेहतरीन मिसाल भी प्रस्तुत करता है।
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