मेडिकल स्टोर पर एनडीपीएस घटक की दवा को बिना क्रय और विक्रय बिल के बेचने के मामले में न्यायालय सेशन न्यायाधीश रविन्द्र कुमार ने मेडिकल स्टोर के मालिक, संचालक और फार्मासिस्ट को कारावास और जुर्माने से दण्डित किया है। न्यायालय के लोक अभियोजक धर्मेन्द्र राठौड़ ने बताया कि 11 जुलाई 2012 को औषधि नियंत्रण अधिकारी दलजीत सिंह उप्पल ने पदमपुर के मदान मेडिकल स्टोर का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मौके पर स्टोर में एनडीपीएस घटक की दवा मिली और मौके पर संचालक अरविन्द्र कुमार उर्फ अरविन्द्र सिंह पुत्र मंगतराम मौके पर मिला। मौके पर बड़ी संख्या में एनडीपीएस घटक की बिना अवधि पार दवा मिली। मौके पर फार्मासिस्ट भी नहीं मिला जबकि फार्मासिस्ट के रुप में सुषमा पत्नी अरविन्द कुमार उर्फ अरविन्द्र पुत्र मंगतराम का नाम अंकित था। मौके पर बुलाने फार्मासिस्ट ने शहर से बाहर होने का हवाला दिया। दवा खरीद और बिक्री के संबंध में रिकॉर्ड की जांच तो सामने आया कि फर्म मदान मेडिकल स्टोर के संचालक ने बड़ी मात्रा में एनडीपीएस घटक की दवा की खरीद और बेचान बिना किसी बिल के किया है। निरीक्षण में उसने यह बात भी स्वीकार कि। औषधि नियंत्रण अधिकारी द्वारा निरीक्षण के बाद विभागीय कार्यवाही पूर्ण कर सक्षम न्यायालय में इस्तगासा पेश किया गया। लोक अभियोजक धर्मेन्द्र राठौड़ के अनुसार न्यायालय ने प्रकरण का निस्तारण करते हुए फर्म मदान मेडिकल के मालिक भगवान दास पुत्र हंसराज, संचालक अरविन्द कुमार उर्फ अरविन्द्र और फार्मासिस्ट सुषमा पत्नी अरविन्द्र कुमार को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1940 के तहत दोषी माना है। न्यायालय ने तीनों को धारा 27(बी)(आईआई), धारा 27(डी), धारा 22(3) में 1-1 साल कारावास और 20-20 हजार रुपए जुर्माने तथा धारा 28 में तीनों को छह-छह माह कारावास और 20-20 हजार रुपए जुर्माने से दण्डित किया है। जुर्माना नहीं देने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
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