हनुमानगढ़। श्री खुशाल दास विश्वविद्यालय के अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी संकाय में मंगलवार को विश्व बौद्धिक संपदा दिवस के मौके पर आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के तत्वावधान में “बौद्धिक संपदा अधिकार: रणनीति, नवाचार एवं पारिस्थितिकी तंत्र” विषय पर वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों को बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) की महत्ता, रणनीतियों और नवाचार के सुरक्षित विकास के प्रति जागरूक करना रहा।
कार्यक्रम में बताया गया कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में शोध और नवाचार को सुरक्षित रखना अत्यंत आवश्यक है। इसी उद्देश्य से आयोजित इस वेबिनार में प्रतिभागियों को समझाया गया कि बौद्धिक संपदा अधिकार किस प्रकार उनके विचारों और आविष्कारों को कानूनी सुरक्षा प्रदान करते हैं तथा उन्हें व्यावसायिक रूप से विकसित करने में सहायक होते हैं। मुख्य वक्ता प्रख्यात आईपीआर विशेषज्ञ डॉ. उमेश केयू ने अपने व्याख्यान में बौद्धिक संपदा अधिकारों की रणनीतिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह केवल कानूनी सुरक्षा का माध्यम ही नहीं, बल्कि नवाचार को बढ़ावा देने और आर्थिक विकास को गति देने का महत्वपूर्ण साधन भी है।

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