अस्थमा क्या है?
अस्थमा एक क्रॉनिक यानी दीर्घकालिक श्वसन रोग है, जिसमें फेफड़ों तक हवा पहुंचाने वाली नलियां संवेदनशील हो जाती हैं। किसी एलर्जी, प्रदूषण, धूल, धुएं या मौसम के प्रभाव से ये वायुमार्ग सिकुड़ जाते हैं। इससे व्यक्ति को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। अस्थमा के मरीजों में लक्षण कभी-कभी ही दिखाई देते हैं, जबकि कुछ लोगों में यह समस्या लगातार बनी रह सकती है। कई बार अचानक अस्थमा अटैक भी आ सकता है, जिसमें तुरंत चिकित्सकीय सहायता की आवश्यकता पड़ती है।
अस्थमा के प्रमुख लक्षण
अस्थमा के लक्षण हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकते हैं। कई बार यह लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ मामलों में गंभीर रूप ले लेते हैं। सामान्यत: निम्न लक्षण अस्थमा की ओर संकेत करते हैं—
■ सांस फूलना या सांस लेने में कठिनाई होना
■ सीने में दबाव या जकड़न महसूस होना
■ सांस छोड़ते समय सीटी जैसी आवाज आना, जिसे व्हीजिंग कहा जाता है
■ रात में या सुबह जल्दी खांसी बढ़ जाना
■ सोते समय सांस लेने में परेशानी होना
■ जल्दी थकान महसूस होना
■ बच्चों में लगातार खांसी और सांस लेते समय आवाज आना
अस्थमा का प्रमुख संकेत माना जाता है। अस्थमा क्यों बढ़ रहा है? यदि मरीज को पहले की तुलना में अधिक सांस लेने में परेशानी होने लगे या राहत देने वाले इनहेलर का उपयोग बार-बार करना पड़े, तो यह अस्थमा के बिगड़ने का संकेत हो सकता है। इसके अलावा खांसी और व्हीजिंग की तीव्रता बढ़ना, सामान्य गतिविधियों में सांस फूलना, पीक फ्लो मीटर टेस्ट में फेफड़ों की क्षमता कम दिखना और रात में बार-बार सांस संबंधी समस्या होना भी इसके संकेत हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अस्थमा के मुख्य कारण: अस्थमा होने के पीछे पर्यावरणीय और आनुवंशिक दोनों कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। कई प्रकार की एलर्जी और बाहरी तत्व इसके ट्रिगर बनते हैं। एलर्जी और प्रदूषण में परागकण (पोलन), घर की धूल और डस्ट माइट्स, मोल्ड और फंगस, पालतू जानवरों के बाल या त्वचा के कण और कॉकरोच के कण शामिल हैं। मौसम और संक्रमण से जुड़े कारणों में ठंडी और सूखी हवा, वायरल संक्रमण, सर्दी और फ्लू तथा मौसम में अचानक बदलाव शामिल हैं। अन्य कारणों में धूम्रपान और वायु प्रदूषण, अधिक शारीरिक श्रम, तनाव और भावनात्मक दबाव, कुछ दवाइयां जैसे एस्पिरिन और इबुप्रोफेन शामिल हैं। इसके अलावा कार्यस्थल पर रसायनों, गैस या धूल के संपर्क में आने वाले लोगों में ‘ऑक्यूपेशनल अस्थमा’ होने का खतरा अधिक रहता है।
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