सीमा सन्देश | श्रीगंगानगर
केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा ‘स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत’ मिशन पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन श्रीगंगानगर में इसकी जमीनी हकीकत बेहद चिंताजनक है। शहर के सार्वजनिक शौचालयों की स्थिति स्वच्छता अभियान की वास्तविकता पर सवाल खड़े करती है। इन्द्रा चौक स्थित सार्वजनिक शौचालय, जो पहले 24 घंटे चालू रहता था, अब लंबे समय से अव्यवस्था का शिकार है। स्थानीय लोगों के अनुसार यह सीमित समय के लिए खुलता है और अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आई हैं। ठेकेदार द्वारा काम छोड़ने के बाद आसपास की गरीब बस्तियों के लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं। मौसम विभाग और पुलिस लाइन के पास बने शौचालय भी लगभग एक वर्ष से बंद पड़े हैं। पुलिस लाइन क्षेत्र में बिजली फिटिंग टूटी हुई है और पानी की टोंटियां गायब हैं। सफाई कर्मचारियों का महीनों से मानदेय लंबित होने से व्यवस्था पूरी तरह ठप है। शहर में ‘स्वच्छ भारत’ अभियान फिलहाल केवल कागजों और विज्ञापनों तक सीमित नजर आ रहा है।
सिस्टम की ‘गंदी’तस्वीर: बदहाल हैं सार्वजनिक शौचालय

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