मौसम का मिजाज अप्रैल महीने में भी बारिश, आंधी का जारी रह सकता है। इसके पीछे की वजह एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभों का आगमन है। यह मौसम गर्मी से राहत दे रहा है, लेकिन बारिश और आंधी-तूफान की वजह से खेतों में खड़ी गेहूं फसल, खासतौर से देर से बोई गई फसल को नुकसान होने की आशंका है। गेहूं के उत्पादन पर असर सरकार के अंतिम आधिकारिक अनुमान के अनुसार, देश में इस बार गेहूं का उत्पादन 120 मिलियन (12 करोड़) टन से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है। हालांकि, तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी और शुरूआती बेमौसम बारिश के कारण कुछ निजी अनुमानों में पैदावार घटने की बात कही गई है। आटा मिलों के लिए एग्रीवॉच द्वारा किए गए एक शुरुआती आकलन के अनुसार, 11 से 22 मार्च के बीच हुई बेमौसम बारिश ने उत्तर और मध्य भारत के गेहूं उत्पादक क्षेत्रों को काफी प्रभावित किया है। इसका सबसे ज्यादा असर उन फसलों पर पड़ा है जो दाना भरने से लेकर पकने की अवस्था में थीं। किसानों के लिए मौसम बन रहा चुनौती स्काईमेट के उपाध्यक्ष महेश पलावत ने एक्स पर जानकारी दी है कि अप्रैल में कई पश्चिमी विक्षोभ अपने साथ बारिश-आंधी लेकर आ सकते हैं। पश्चिमी विक्षोभ बहुत ज्यादा गंभीर हो सकता है, जिसका खेतों में तैयार खड़ी फसलों पर बेहद विनाशकारी प्रभाव पड़ने की आशंका है। पलावत ने कहा है कि किसान इस मौसम से बचने के लिए एक हफ्ते के अंदर अपनी तैयार खड़ी फसलों की कटाई कर लें।एग्रीवॉच की रिपोर्ट बताती है कि अलग-अलग जिलों में इस बारिश का असर भी अलग-अलग रहा है। बारिश के प्रभाव और फसल की स्थिति के आंकलन के आधार पर बताया गया है कि पूरे भारत के स्तर पर गेहूं की कुल उत्पादकता में लगभग 1.0 से 1.5 प्रतिशत की मामूली गिरावट आ सकती है। हालांकि, जो राज्य इस बेमौसम बारिश से ज्यादा प्रभावित हुए हैं, वहां यह नुकसान थोड़ा ज्यादा यानी 2 से 3 प्रतिशत तक रहने की आशंका है। आंकलन में यह भी चेतावनी दी गई है कि अगर उत्तर और मध्य भारत में अगले एक सप्ताह से 10 दिनों तक बारिश का सिलसिला चलता रहा, तो नुकसान का यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
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