सीमा सन्देश# संगरिया। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा भगत पुरा रोड़ पार्क आश्रम में भारतीय नव वर्ष विक्रमी संवत 2083 और वैसाखी के उपलक्ष्य पर आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में साध्वी गौरी भारती ने कहा कि बैसाखी भारत का एक प्रमुख फसल उत्सव और सांस्कृतिक त्योहार है। यह फसल के पकने की खुशी में मनाया जाता है, जहाँ किसान प्रकृति को धन्यवाद देते हैं।
किन्नु ग्रेगोरियन कैलेंडर, जिसे हम पाश्चात्य अंधानुकरण के कारण मानने लगे हैं। उसका निर्माण केवल कुछ अंदाजों व अनुमानों के आधार पर हुआ है। इस ग्रेगोरियन कैलेंडर में, जिसमें अब जनवरी से दिसंबर तक 12 महीने हैं, पहले उसमे मात्र 10 महीने ही थे। जुलाई व अगस्त का महीना इसमें बाद में जोड़ा गया। जुलाईं का महीना श्रद्धांजलि थी जूलियस सीजर को और अगस्त महीना संत आॅगस्टाइन को समर्पित है। हम अपनी भारतीय संस्कृति व सभयता की वैज्ञानिकता व महिमा को समझते हुए विऋमी संवत के अनुसार नववर्ष मनायें, जिसका आधार कल्पनाएं या अनुमान नही, बल्कि अध्यात्म और विज्ञान है।
कार्यक्रम के साध्वी निशा भारती, साध्वी चंडा भारती, साध्वी रेनू भारती साध्वी सविता भारती ने प्रेरणादायक सांस्कृतिक भजनों व दिव्य मन्त्रों का उच्चारण कर विश्व शान्ति और सर्व जगत कल्याण की मंगल प्रार्थना भी की।
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