सीमा संदेश #श्रीगंगानगर हम अपने धर्म ग्रंथों को जब तक नहीं पढ़ेंगे तब तक हमें संतों की पहचान कैसे होगी। ग्रंथ ही हमें अध्यात्म की ओर लेकर जाते हैं। यह उद्गार सोमवार को पदमपुर रोड स्थित बिश्नोई मंदिर में अखिल भारतीय बिश्नोई युवा संगठन के तत्वावधान में श्री जाम्भाणी हरि कथा का शुभारंभ करते हुए जैसला से पधारे स्वामी रामाचार्य जी महाराज ने व्यक्त किए। स्वामी रामाचार्य ने कहा कि कथा को अध्यात्म दीप कहा जाता है। जैसे अंधेरे में कोई दीपक हमें यह दिखाता है वैसे ही अज्ञान के अंधेरे में कथा दीपक बनकर यह दिखाती है। उन्होंने बताया कि श्री जम्भेश्वर भगवान ने शब्दवाणी में हमें 5 सूत्र दिए हैं। इन सूत्रों से हम अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं। स्वामी रामाचार्य जी ने कहा कि 120 शब्दवाणी की अंतिम वाणी की एक पंक्ति “ह्यभलियो होय सो भली बुध आवै, बुरियो बुरी” का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी ओछे कर्म नहीं करने, ओछी वाणी कभी नहीं बोलनी, ओछा आचरण नहीं होना चाहिए, ओछा चरित्र नहीं हो, ओछी दृष्टि नहीं हो, ओछी भावना नहीं होनी चाहिए। 120 शब्दवाणी पाठ आज से कथा से पूर्व संस्था प्रधान शिव सहारण, पूर्व प्रधान भीमसेन गोदारा, तथा युवा संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अतुल मांझू एवं जिलाध्यक्ष सुनील सहारण के नेतृत्व में संगठन पदाधिकारियों अशोक पूनियां, सीए सुनील बेनीवाल, अखिलेश गोदारा, एडवोकेट अनिल खीचड़, शिव कड़वासरा, शिवदत्त खीचड़, एड. विक्रम सिहाग, राजेन्द्र गोदारा, देवीलाल मंडा, राजेन्द्र धारणिया, राजेन्द्र सहारण ने स्वामी रामाचार्य का पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया। संगठन जिलाध्यक्ष सुनील सहारण ने बताया कि मंगलवार सुबह 120 शब्दवाणी पाठ का वाचन होगा, जो कथा समापन पर 19 अप्रैल तक चलेगा। शहर के 45 किलोमीटर दायरे से कथा श्रवण के लिए श्रद्धालुओं को लाने के लिए नि:शुल्क वाहनों की व्यवस्था की गई है।
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