सीमा सन्देश # भोमपुरा। इलाके में अमन-चैन और खुशहाली की कामना को लेकर तेजस्वी संत बलदेवनाथ महाराज की 9 धुनी तप साधना लगातार नौवें वर्ष भी जारी है। तप को सच्चा त्याग मानने वाले संत बलदेवनाथ महाराज 46 डिग्री तक पहुंच चुके तापमान और प्रचंड गर्मी में खुले आसमान के नीचे यह कठिन साधना कर रहे हैं। संत बलदेवनाथ महाराज ने यह 41 दिवसीय तप साधना बुद्ध पूर्णिमा के दिन से प्रारंभ की है, जो योगिनी एकादशी (21 जून) को पूर्ण होगी। वे प्रतिदिन सुबह सवा 11 बजे से शाम 4 बजे तक 31×31 फीट के धुना स्थान में 9 अनवरत जलती धुनियों के बीच बैठकर तप करते हैं। यह तप साधना वे अपने गुरु महंत श्री प्रेमनाथ महाराज के बताए मार्ग पर कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि बलदेवनाथ महाराज ने वैराग्य धारण करने से पूर्व लगभग 17 वर्षों तक अपने गुरु की सेवा की थी। तप साधना के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं अनुयायी दिनभर आनंदगढ़ डेरे में पहुंचकर संत के दर्शन कर रहे हैं और आशीर्वाद प्राप्त कर रहे हैं। आनंदगढ़ डेरे का इतिहास काफी पुराना है। इसकी स्थापना वर्ष 1965 में महंत श्री प्रेमनाथ महाराज ने की थी। मान्यता है कि उन्होंने ग्रामीणों को बार-बार हो रही आगजनी की समस्या से निजात दिलाई थी। इसके बाद उन्होंने भोमपुरा में डेरे की स्थापना की तथा वर्ष 1978 में रावतसर में भी नाथ जी डेरे की स्थापना की। महंत प्रेमनाथ महाराज 10 मई 2014 को ब्रह्मलीन हो गए थे। उनकी समाधि रावतसर स्थित डेरे में है, जहां प्रतिवर्ष उनके ब्रह्मलीन दिवस पर सत्संग एवं भंडारे का आयोजन किया जाता है। संत बलदेवनाथ महाराज का मानना है कि तप ही सच्चा कर्म है। वे कहते हैं कि साधु संत सदियों से मानव कल्याण का संदेश देते आए हैं और हर सनातनी को गुरु नाम का स्मरण करना चाहिए, जिससे इहलोक और परलोक दोनों का कल्याण संभव है।
संत बलदेवनाथ महाराज की 9 धुनी तपसाधना जारी, 41 दिनों तक करेंगे तप

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