सीमा सन्देश # हनुमानगढ़। जंक्शन एवं टाउन की अनाज मंडियों में मंगलवार से गेहूं की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकारी खरीद का विधिवत सुचारू रूप से श्रीगणेश हो गया। हालांकि इससे पहले भी खरीद शुरू कर दी गई थी, लेकिन पोर्टल में आ रही तकनीकी खामियों के विरोध में सोमवार को व्यापारियों, किसानों व मजदूरों ने जिला कलक्ट्रेट का घेराव कर प्रदर्शन किया था। इसके बाद सरकार की ओर से विसंगतियों को दूर करने के बाद मंगलवार से खरीद प्रक्रिया फिर से सुचारू रूप से शुरू हो पाई। सबसे पहले जंक्शन और उसके बाद टाउन धानमंडी में किसानों की गेहूं फसल की एमएसपी पर खरीद शुरू की गई। दोनों मंडियों में तिलम संघ की ओर से गेहूं की खरीद की जा रही है।
इस मौके पर विधायक प्रतिनिधि संतोष बंसल, खाद्य व्यापार संघ अध्यक्ष सुमित रणवां, फूडग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन संस्था के अध्यक्ष रामलाल किरोड़ीवाल, व्यापार संघ अध्यक्ष पदमचंद जैन, प्यारेलाल बंसल, मंडी पर्यवेक्षक आशाराम, क्यूआई सतपाल सिंह, व्यापार मंडल अध्यक्ष धर्मपाल जिन्दल, फूडग्रेन व्यापार मंडल अध्यक्ष महावीर सहारण, मथुरादास बंसल, जोगेंद्र गर्ग, देवेन्द्र बंसल, अनिल बंसल, गोपाल जिन्दल, विजय लखोटिया सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। खरीद शुरू होते ही मंडी में फिर से चहल-पहल लौट आई और किसानों के चेहरे पर राहत नजर आई। इस दौरान व्यापारियों व किसान प्रतिनिधियों ने कहा कि आपसी संवाद और समझदारी से विवाद का समाधान संभव है। उन्होंने प्रशासन, व्यापारियों, मजदूरों और किसानों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखने पर जोर दिया, ताकि भविष्य में इस प्रकार की स्थिति उत्पन्न न हो। मंडी में खरीद शुरू होने से क्षेत्र के हजारों किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और आर्थिक गतिविधियां भी तेज होंगी।इस दौरान व्यापारियों ने आंदोलन के समय महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मजदूर नेताओं का सम्मान भी किया। माकपा नेता रामेश्वर वर्मा, सीटू जिलाध्यक्ष आत्मा सिंह, जिला सचिव शेर सिंह शाक्य, रघुवीर वर्मा, सुल्तान खान, गुरप्रेम सिंह, किसान नेता अवतार सिंह बराड़, विक्रम नैण, मजदूर नेता सतपाल दामड़ी, दर्शन जांड और पवन का माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया गया। व्यापारियों ने कहा कि मजदूरों के सहयोग से ही यह आंदोलन सफल हो सका और समय रहते समाधान संभव हुआ।
खरीद की शुरुआत के साथ ही पहली ढेरी गांव मक्कासर निवासी किसान संदीप स्वामी की खरीदी गई। इस दौरान किसान को राज्य व केंद्र सरकार की ओर से स्वीकृत 150 रुपये बोनस सहित कुल 2735 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से भुगतान किया गया।
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