सीमा सन्देश # हनुमानगढ़। गेहूं खरीद व्यवस्था में आ रही तकनीकी खामियों और सरकार की कथित नीतियों के विरोध में आंदोलन तेज हो गया है। रविवार को टाउन और जंक्शन दोनों स्थानों पर मंडियां पूरी तरह बंद रहीं और व्यापारिक गतिविधियां ठप हो गईं। सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ धरना दोपहर 2 बजे तक जारी रहा। प्रदर्शनकारियों द्वारा मंडी के सभी गेट बंद करने से आवक-जावक नहीं हो सकी। बड़ी संख्या में किसान, मजदूर और व्यापारी धरना स्थल पर मौजूद रहे। किसान, मजदूर व व्यापारियों का संयुक्त धरना, प्रशासन नहीं पहुंचा तो कलेक्ट्रेट कूच का ऐलान धरना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगों को प्रशासन के सामने रखना चाहते थे, लेकिन दोपहर 2 बजे तक न तो मंडी सचिव और न ही कोई अन्य प्रशासनिक अधिकारी मौके पर वार्ता के लिए पहुंचा। इससे किसानों, मजदूरों और व्यापारियों में रोष और अधिक बढ़ गया। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के इस रवैये को गैर-जिम्मेदाराना बताया। आक्रोशित लोगों ने मौके पर ही आंदोलन को और तेज करने का निर्णय लिया। सर्वसम्मति से घोषणा की गई कि सोमवार को सभी किसान, मजदूर और व्यापारी कलेक्ट्रेट की ओर कूच करेंगे। साथ ही किसानों से अपील की गई कि वे अपने गेहूं के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचें और वहीं पर अपना विरोध दर्ज कराएं। यह भी कहा गया कि यदि इसके बाद भी सरकार और प्रशासन ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि 15 अप्रैल तक मंडियों में चक्का जाम और कार्य बहिष्कार जारी रहेगा। उन्होंने सरकार से मांग की कि तकनीकी खामियों को तुरंत दूर कर गेहूं खरीद प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और सुचारू बनाया जाए। उनका कहना था कि न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीद की वर्तमान व्यवस्था पूरी तरह विफल साबित हो रही है। धरने के दौरान विभिन्न व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने सरकार की नीतियों पर कड़ा प्रहार किया। व्यापार संघ अध्यक्ष पदमचंद जैन, व्यापार मंडल अध्यक्ष धर्मपाल डिम्पल जिंदल, खाद्य व्यापार संघ अध्यक्ष सुमित रणवां, फूडग्रेन व्यापार मंडल अध्यक्ष महावीर सहारण, फूडग्रेन मर्चेंट्स एसोसिएशन संस्था के अध्यक्ष रामलाल किरोड़ीवाल, सीटू जिलाध्यक्ष आत्मा सिंह, सीटू जिला सचिव शेर सिंह शाक्य, सुलतान खान, गुरप्रेम सिंह, किसान अवतार सिंह बराड़, मजदूर नेता सतपाल दामड़ी ने संयुक्त रूप से कहा कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी सरल और पारदर्शी तरीके से गेहूं खरीद शुरू की जानी चाहिए थी, लेकिन सरकार ने व्यवस्था को और अधिक जटिल बना दिया है। इसके कारण किसानों और व्यापारियों को परेशानी का सामना करने के साथ आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
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