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50 करोड़ की जमीन का मामला:कोर्ट से स्टे विड्रॉ होने के 20 दिन में ही हो गई मोना की हत्या, सुपारी देने के आरोपी

बीकानेर. मोनालिसा मर्डर केस की गुत्थी सुलझाने का दावा कर रही पुलिस ने जमीन विवाद की जांच से हाथ खींच लिए हैं। उन आरोपियों को क्लीन चिट दे दी, जिन पर मोना की हत्या की सुपारी देने का आरोप लगा है।
जयपुर स्थित ओमेगा सिटी के 73 नंबर फ्लैट में मोनालिसा की मौत चार फरवरी 2021 को हुई थी। घटना के 21 महीने बाद डीजीपी के आदेश पर 21 नवंबर 2022 को सदर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ। पुलिस ने इतने पुराने मामले की 30 दिन में जांच करके हत्या का खुलासा कर दिया। एक दर्जन से अधिक लोगों के बयान लिए।

साक्ष्य जुटाए और भवानी सिंह सहित 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने जांच में माना कि भवानी सिंह ने ही पत्नी मोनासिला की हत्या की। भवानी सिंह अभी जेल में है। बाकी सभी की जमानत हो चुकी है। मृतका की मां रूना चौधरी ने एफआईआर में रविंद्र रामपुरिया पर मोनालिसा को मारने की सुपारी भवानी सिंह को देने का आरोप लगाया था। भवानी सिंह सहित रविंद्र उसके पुत्र चिराग रामपुरिया, जसवंत जाट और एक अज्ञात के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ, लेकिन पुलिस ने नामजद आरोपियों में से सिर्फ भवानी सिंह को ही गिरफ्तार किया। हत्या के मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने जमीन विवाद की जांच से ही हाथ खींच लिए हैं तथा नामजद आरोपियों को क्लीन चिट दे दी है। पुलिस ने अपनी जांच में उनका संबंध हत्या से नहीं माना है।

दरअसल यह मामला जयपुर रोड पर बेशकीमती जमीन से जुड़ा हुआ है, जिसे लेकर सालों से विवाद चल रहा है। विवादित करीब सात बीघा जमीन की वर्तमान बाजार कीमत 50 करोड़ से ज्यादा बताई जा रही है। चौंकाने वाली बात ये है कि इस जमीन के विवाद को लेकर दिसंबर 2020 में मोना और चिराग रामपुरिया के बीच राजीनामे का दस्तावेज भी सामने आया है। उसके बाद 16 जनवरी 2021 को मोना ने कोर्ट से केस विड्रो कर लिया। इसके 19वें दिन यानी चार फरवरी को मोनालिसा की मौत हो गई। इस जमीन को लेकर राजनीति से जुड़े जमीनी कारोबारियों के नाम भी चर्चा में हैं।