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‘5 साल वसुंधरा को चैन से नहीं रहने दिया’:बोले – सरकार रिपीट के लिए 15 महीनों में हमारे पास अच्छा मौका

जयपुर. पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस सरकार रिपीट करने के लिए अलग काम करने की सलाह दी है। पायलट ने कहा- राजस्थान में 1998 से सरकार रिपीट नहीं होने का सिलसिला चल रहा है। ऐसा नहीं है कि सरकारें रिपीट नहीं हो सकती। दिल्ली में शीला दीक्षित के समय 3 बार सरकार बनी। हरियाणा में हुड्डा ने दो बार और तरूण गोगोई ने असम में दो बार सरकार बनाई। मैंने पार्टी स्तर पर विस्तार से बात रखी है। हमारे पास अच्छा मौका है, अभी 15 महीने बचे हैं, उसमें हम कुछ ऐसा करें कि लोगों का विश्वास दोबारा जीता जा सके। इसके लिए जो कुछ करना है वह पार्टी के अंदर की बात है। इसके बारे में डेढ़ साल पहले मैंने रूपरेखा बनाकर दी है, उस रास्ते पर हम चल रहे हैं। कुछ कदम उठाए गए हैं। पायलट गुरुवार को जयपुर में टॉक जर्नलिज्म सेमिनार में बोल रहे थे।
एक सवाल के जवाब में पायलट ने कहा कि मेरे अध्यक्ष रहते विपक्ष में मैंने जितने चुनाव लड़े सब में बीजेपी को हराया है। वसुंधरा राजे के सीएम रहते हुए बीजेपी के 163 विधायक थे। पांच साल मैंने चैन से नहीं रहने दिया। जब जब भी वसुंधरा राजे सरकार ने जनहित का काम नहीं किया हमने सड़कों पर उतरकर विरोध किया। मैं तो बीजेपी के खिलाफ लड़ते आया हूं। अगर बीजेपी को लगता है कि सब कुछ जनता उनकी जेब में है तो यह उनकी गलतफहमी है। आप डिलीवर नहीं करोगे तो लोग वोट नहीं देंगे।
पैशेंस इसलिए जरूरी…..
राहुल गांधी की ओर से पैशेंस की तारीफ पर पायलट ने कहा कि कोई गुणों की तारीफ करता है तो यह अच्छी बात है। पैशेंस इसलिए भी जरूरी है कि मैं विश्वास करता हूं कि अगला चुनाव जीतने के बारे में पार्टी ने मेरे सुझावों को बहुत अच्छी तरह से लिया है। हमारे पूरे कुनबे का का सामूहिक उद्देश्य यही है कि राजस्थान में फिर से सरकार कैसे बनाएं।
इस्तीफा दिया था लेकिन मंजूर नहीं किया
पायलट ने कहा- जनवरी 2014 में मैं अध्यक्ष बना था। तीन महीने बाद ही लोकसभा चुनाव थे। जिनमें हम सभी सीटें हार गए थे, मैं भी हार गया था। इस हार की जिम्मेदारी लेते हुए मैंने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को इस्तीफा दे दिया था। लेकिन उन्होंने इस्तीफा स्वीकार नहीं किया, कहा ?कि अभी दो महीने अध्यक्ष बने हुए हैं, जाकर राजस्थान में पार्टी को नए सिरे से खड़ा कीजिए। उसके बाद सोनिया गांधी से आशीर्वाद लेकर मैंने ताकत से काम करना शुरू?किया। इस्तीफे की यह बात मैंने किसी को नहीं बताई थी। मुझे जिन विकट हालात में पार्टी ने जिम्मेदारी दी मैंने पांच साल ताकत लगाकर काम किया।
…किस्मत से ज्यादा किसी को नहीं मिलता
पायलट ने कहा कि समय से पहले और किस्मत से ज्यादा किसी को मिलता नहीं है। व्यक्ति को एंबिशियस होना ही चाहिए। अगर आपमें जील नहीं है, टीस नहीं है, भूख नहीं है खुद को साबित करने की या कुछ कर गुजरने की तो जीवन में रस नहीं रहेगा। सब कुछ पद से नहीं नापा जाता। आपने लोगों के दिलों पर छाप छोड़ी या नहीं यह अहम है।
‘युवा केवल नारे लगाने के लिए नहीं’
पायलट ने कहा- समय किसी के लिए नहीं रुकता। हमें समय के साथ चलना हैं। आजकल कितना आईटी का जमाना हो, नेता रातों रात नहीं बनता। एक प्रोसेस से गुजरना पड़ता है, 15 साल लगते हैं। मुझे 26 की उम्र में एमपी का टिकट दिया, मैं कम उम्र में अध्यक्ष बन गया। मेरे अध्यक्ष रहते जब निकाय चुनाव हुए, तब मैंने फोर्टी बिलो फोर्टी का नारा दिया था जिसमें 40 फीसदी टिकट 40 से कम उम्र के नेताओं को दिया गया। युवाओं से केवल नारे लगवाने या दरी-पट्टी बिछाने के काम में ही नहीं उन्हें आगे भी लाना होगा, तभी नई युवा लीडरशिप विकसित होगी।