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21 महीने के निचले स्तर पर थोक महंगाई:नवंबर में 5.85% पर रही, सब्जियां और खाने-पीने का सामान हुआ सस्ता

नई दिल्ली. नवंबर में थोक महंगाई (WPI) दर में बड़ी गिरावट देखने को मिली। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, होलसेल प्राइस-बेस्ड इन्फ्लेशन (WPI) 5.85% पर आ गई है। ये इसका 21 महीने का निचला स्तर है। इससे पहले फरवरी 2021 में महंगाई दर इससे कम 4.83% पर थी। वहीं पिछले महीनों की बात करें तो अक्टूबर में ये 8.39%, सितंबर में 10.70%, अगस्त में 12.41% और जुलाई में 13.93% पर थी। पिछले साल नवंबर 2021 में WPI 14.87% रही थी।

खाद्य महंगाई 2.17% पर आई
थोक महंगाई दर में गिरावट की मुख्य वजह खाद्य महंगाई में गिरावट है जो 22 महीने के निचले लेवल 2.17% पर आ चुका है, जबकि अक्टूबर 2022 में खाद्य महंगाई दर 6.48% पर थी। वहीं फूड इंडेक्स महीने दर महीने 1.8% पर आ चुकी है।

मैन्युफैक्चरिंग प्रोडक्ट्स की महंगाई भी घटकर 3.59% पर आ गई है, जो पहले 4.42% पर थी। ईंधन और बिजली की महंगाई दर भी अक्टूबर के 23.17% से घटकर नवंबर में 17.35% पर गई है।

  • नवंबर में फूड इन्फ्लेशन 2.17% पर पहुंच गया है, जो अक्टूबर में 6.48% था।
  • सब्जियों की महंगाई 17.61% से घटकर -20.1% हो गई है।
  • आलू की महंगाई 13.75 से घटकर -49.79% पर आ गई है।
  • अंडे, मीट और मछली की महंगाई 3.63% से घटकर 2.27 हो गई है।
  • प्याज की महंगाई -19.2 से घटकर -30.02% पर आ गई है।
  • फ्यूल और पावर इंडेक्स, जिसमें LPG, पेट्रोलियम और डीजल जैसे आइटम शामिल हैं, इनकी महंगाई 23.17% से घटकर 17.35% हो गई है।

WPI का आम आदमी पर असर
थोक महंगाई के लंबे समय तक बढ़े रहना चिंता का विषय है। ये ज्यादातर प्रोडक्टिव सेक्टर को प्रभावित करती है। यदि थोक मूल्य बहुत ज्यादा समय तक उच्च रहता है, तो प्रड्यूसर इसे कंज्यूमर्स को पास कर देते हैं। सरकार केवल टैक्स के जरिए WPI को कंट्रोल कर सकती है।

जैसे कच्चे तेल में तेज बढ़ोतरी की स्थिति में सरकार ने ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी कटौती की थी। हालांकि, सरकार टैक्स कटौती एक सीमा में ही कर सकती है, क्योंकि उसे भी सैलरी देना होता है। WPI में ज्यादा वेटेज मेटल, केमिकल, प्लास्टिक, रबर जैसे फैक्ट्री से जुड़े सामानों का होता है।

11 महीने के निचले स्तर पर आई रिटेल महंगाई
नवंबर महीने में रिटेल महंगाई (CPI) घटकर 5.88% पर आ गई है। ये 11 महीनों का निचला स्तर है। दिसंबर 2021 में महंगाई 5.59% पर थी। इसके बाद से ये लगातार 6% के ऊपर बनी हुई थी। अक्टूबर 2022 में रिटेल महंगाई 6.77% थी। वहीं सितंबर में ये 7.41% पर थी। एक साल पहले यानी नवंबर 2021 में ये 4.91% थी। ये लगातार दूसरे महीने CPI में गिरावट देखने को मिली है।

महंगाई कैसे मापी जाती है?
भारत में दो तरह की महंगाई होती है। एक रिटेल, यानी खुदरा और दूसरी थोक महंगाई होती है। रिटेल महंगाई दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) भी कहते हैं। वहीं, होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) का अर्थ उन कीमतों से होता है, जो थोक बाजार में एक कारोबारी दूसरे कारोबारी से वसूलता है। ये कीमतें थोक में किए गए सौदों से जुड़ी होती हैं।

दोनों तरह की महंगाई को मापने के लिए अलग-अलग आइटम को शामिल किया जाता है। जैसे थोक महंगाई में मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी 63.75%, प्राइमरी आर्टिकल जैसे फूड 20.02% और फ्यूल एंड पावर 14.23% होती है। वहीं, रिटेल महंगाई में फूड और प्रोडक्ट की भागीदारी 45.86%, हाउसिंग की 10.07%, कपड़े की 6.53% और फ्यूल सहित अन्य आइटम की भी भागीदारी होती है।