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स्वास्थ्य मंत्रालय का अधिकारी बनकर आरोपित ने 6 लोगों से की 15 करोड़ की ठगी

नई दिल्ली। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का अधिकारी बनकर छह लोगों से 15 करोड़ रुपये ठगी करने वाले आरोपित उमेश बत्रा को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित, पीड़ितों को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से विभिन्न राज्यों में कोविड वैक्सीन के परिवहन का ठेका दिलाने के बहाने उनसे ठगी की।
ठगी की वारदात में शामिल मास्टर माइंड हरमेन सबरवाल व गोविंद तुल्शन समेत पांच आरोपितों को पुलिस पहले गिरफ्तार कर चुकी है। पीड़ितों की शिकायत पर इसी साल 13 अप्रैल को दिल्ली पुलिस ने ठगी की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया था।
यह है पूरा मामला
डीसीपी एम आइ हैदर के मुताबिक सुनील कौशिक समेत अन्य ने शिकायत कर आरोप लगाया था कि कोविड टीकों के परिवहन के लिए वर्क आॅर्डर देने के नाम पर उनसे तीन से चार करोड़ रुपये की ठगी की गई है। ठेका दिलाने से पहले पीड़ितों को विश्वास में लेने के लिए उन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सम्मेलन कक्ष में ले जाया गया, जहां गिरोह के कुछ सदस्यों द्वारा मंत्रालय का कर्मी बनकर उनसे पूछताछ की और कुछ दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराने के बाद उन्हें वापस भेज दिया था।
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जांच में अब तक छह पीड़ितों की पहचान की गई जिनसे 15 करोड़ रुपये ठगे जाने का पता चला है। पिछले साल मई में पीड़ित, आरोपितों के संपर्क में आए थे। आरोपितों ने पीड़ितों से पेशकश की कि वे कोविड टीकों के परिवहन के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से प्राप्त कार्य आदेश का प्रबंधन कर सकते हैं। उन्होंने खुद को मंत्रालय के अधिकारियों के रूप में प्रतिरूपित किया और जाली कार्य आदेशों पर शिकायतकतार्ओं के हस्ताक्षर करा लिए। इस तरह जाली वर्क आॅर्डर के एवज में पीड़ितों से 15 करोड़ रुपये ठग लिए गए।
जांच के बाद पुलिस ने बीते अगस्त व सितंबर में हरमन सभरवाल, गोविंद तुलस्यान, दिप्राना तिवारी, त्रिलोक सिंह और मृत्युंजय राय नाम के पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया था। उमेश बत्रा खुद को स्वास्थ्य मंत्रालय का अधिकारी बताकर कांफ्रेंस रूम में बैठा था। पांच आरोपितों को गिरफ्तार करने के बाद प्रफुल्ल कुमार नायक, पवन कुमार राय व उमेश बत्रा फरार हो गए थे। इन्हें दबोचने के लिए हर संभावित ठिकानों पर कई बार छापेमारी की गई किंतु वे पुलिस के हाथ नहीं आ रहे थे।
एसीपी हरि सिंह, इंस्पेक्टर अमित प्रताप सिंह और सिपाही मनदीप की टीम ने अंतत उमेश बत्रा को गिरफ्तार कर लिया। इनसे पूछताछ में दो और आरोपित विनोद कुमार शर्मा और विनय गुप्ता के नाम का पता चला है। ये दोनों भी खुद को मंत्रालय के अधिकारी बनकर स्वास्थ्य मंत्रालय के सम्मेलन कक्ष में पीड़ितों से मुलाकात कर चुके है।
उमेश बत्रा नौवीं तक पढ़ा है। इससे पहले वह एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में काम करता था। लाकडाउन के दौरान उसकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई जिसके बाद प्रफुल्ल कुमार नायक और हरमन सभरवाल के संपर्क में आकर वह भी ठगी की साजिश में शामिल हो गया था।