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स्वस्थ गंगानगर मिशन में चौंकाने वाला खुलासा:बच्चे बीमार, स्कूलों के 1.02 लाख छात्रों में खून की कमी, वजह जंक फूड

श्रीगंगानगर.

कृषि प्रधान और उच्च जीवन के स्तर के लिए माने जाने वाले श्रीगंगानगर जिले में फास्ट और जंक फूड बच्चों को बीमारियां दे रहे हैं। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 12 वीं तक के 56 प्रतिशत विद्यार्थी खून की कमी के शिकार हैं।

अन्य बीमारियों से भी ग्रस्त हैं। ये चौंकाने वाले तथ्य जिला प्रशासन अौर स्वास्थ्य विभाग के अभियान स्वस्थ गंगानगर मिशन में 180383 विद्यार्थियों की स्वास्थ्य की जांच की रिपोर्ट में सामने आए हैं। 14 नवंबर से शुरू हुए इस अभियान में डेढ़ महीने के दौरान चिन्हित किए 190653 विद्यार्थियों में 180383 के स्वास्थ्य की जांच की गई।

इसमें 102003 विद्यार्थियों में खून की कमी है। मिशन के पहले चरण में सरकारी स्कूलों के बच्चों के स्वास्थ्य की जांच गई थी। जिला कलेक्टर सौरभ स्वामी के अनुसार जिन विद्यार्थियों का स्वास्थ्य परीक्षण हो चुका है। उनकी चिन्हित बीमारियों के इलाज की शुरुआत इसी महीने से कर दी जाएगी। अब 30 जनवरी से आंखों व दांतों के इलाज के शिविर लगाए जाएंगे।

अभियान में श्रीगंगानगर ब्लॉक में 30241, अनूपगढ़ ब्लॉक में 30210, घड़साना ब्लॉक में 21662, सूरतगढ़ ब्लाक में 36034, सादुलशहर ब्लॉक में 16327, पदमपुर ब्लॉक में 16490, श्रीकरणपुर ब्लॉक में 15369 और रायसिंहनगर ब्लॉक में 24320 विद्यार्थियों को स्वास्थ्य जांच के लिए चिन्हित किया गया था।

इन विद्यार्थियों में हीमोग्लोबिन की स्थिति, कटे होठ व तालू की स्थिति, आंखों, त्वचा, दांतों, कानों की जांच, बोलने, सुनने और पढ़ने के दौरान होने वाली समस्या, टीबी, पैरों की विकृति, कुपोषण, मानसिक विमंदिता, मांसपेशियों की कमजोरी, विटामिनों की कमी, अस्थमा, बौनापन सहित 26 जांच की गई थी।

इलाज में लिया जाएगा विभिन्न संस्थाओं का सहयोग

जिला कलेक्टर सौरभ स्वामी के अनुसार प्रारंभिक स्वास्थ्य जांच में विद्यार्थियों में जो बीमारियां चिन्हित की गई हैं, उनके इलाज के लिए अलग-अलग ग्रुप बनाकर उपचार किया जाएगा। इनकी गहन जांच करवाई जाएगी। सामान्य बीमारियों का मौके पर उपचार देने की व्यवस्था हागी। निशुल्क दवा व जांच योजना में लाभान्वित किया जाएगा। अगर किसी विद्यार्थी को विशेष उपचार की जरूरत पड़ी तो उसे विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से इलाज के लिए हायर सेंटर पर भेजा जाएगा।

जिला अस्पताल के डेंटिस्ट डॉ. सुभाष राजपूत के अनुसार विद्यार्थियों में दांतों की बीमारियां होने की वजह से रात को ब्रश और खाने पीने के बाद कुल्ला न करना है। इससे भाेजन दांतों में सड़ने से दांतों और मसूड़ों का संक्रमण बढ़ाता है। अभिभावकों को अपने बच्चों को रात के समय ब्रश और खानपान के बाद अच्छी तरह कुल्ला करने की आदत डालनी चाहिए।

आगे क्या: स्वस्थ गंगानगर मिशन में अगले चरण में आंगनबाड़ी केंद्रों पर नामांकित एक लाख से ज्यादा बच्चों के स्वास्थ्य का परीक्षण होगा। इसके लिए जिला प्रशासन, स्वास्थ्य और महिला एवं बाल विकास विभाग का संयुक्त अभियान चलेगा।

बीमारियों की कैसी स्थिति:

खून की कमी के 102003 , दृष्टि दोष के 5979, दांतों की बीमारी के 7600, कटे होठ व तालू के 498, कम सुनना के 740 , टीबी के 185, जन्मजात बहरापन के 322, कुपोषण के 694, स्लो लर्निंग के 939, मानसिक विमंद के 808, कान खराब के 788, चमड़ी रोग के 1763, हकलाना व तुतलाना के 1132 और हडि्डयां कमजोर के 544 मरीज हैं।

एक्सपर्ट व्यू: संतुलित आहार की अनदेखी अभिभावकों का गंभीर नहीं है होना

बच्चों में खून की कमी की वजह संतुलित आहार की अनदेखी करना है। बच्चों को घर पर उपलब्ध सीजनल हरी सब्जियां, फल व अनाज खिलाने पर कम ध्यान दिया जा रहा है। बच्चे पैक्ड नमकीन, जंक व फास्ट फूड ज्यादा खाते हैं। अभिभावक भी उन्हें संतुलित आहार देने के प्रति ज्यादा गंभीर नहीं होते। जंक व फास्ट फूड का चलन सेहत बिगाड़ रहा है। जिला नहरी सिंचाई पर आधारित होने से हरी सब्जियों व अनाज का उत्पादन ज्यादा होता है। जो सस्ता और सहजता से उपलब्ध भी रहता है। लेकिन संतुलित आहार में इसका महत्व नहीं समझा जा रहा है। अभिभावकों को उनके बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की जरूरत है।
डॉ. मुकेश मेहता, एडिशन सीएमएचओ
डॉ. संजय राठी, शिशु रोग विशेष, डीएच