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सुप्रीम कोर्ट का जुबैर को रिहा करने का आदेश, मुकदमे दिल्ली स्थानांतरित

नयी दिल्ली (वार्ता). उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को आॅल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को कथित आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में उत्तर प्रदेश में दर्ज सभी छह मुकदमों को सम्मिलित कर दिल्ली स्थानांतरित करने के साथ-साथ आरोपी को रिहा करने का आदेश दिया।
न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने जुबैर की एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह भी आदेश दिया कि भविष्य में यदि याचिकाकर्ता के खिलाफ इस मामले में अलग प्राथमिकी दर्ज की जाती है तो उसके खिलाफ अंतरिम तौर पर दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।
शीर्ष अदालत ने जुबैर के खिलाफ कथित आपत्तिजनक ट्वीट के आरोपों की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक विशेष जांच दल को भंग कर दिया तथा सभी मामलों को दिल्ली पुलिस की विशेष प्रकोष्ठ को स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने इस तथ्य पर गौर किया कि जुबैर के ट्वीट के मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा जांच की जा रही है। इस मामले में उसे दिल्ली की पटियाला हाउस अदालत से जमानत मिल चुकी है। ऐसे में उसी तरह के मामले में आरोपी को लगातार हिरासत में रखने का कोई औचित्य नहीं था।
शीर्ष अदालत ने स्पष्ट तौर पर कहा कि उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज मामलों को स्थानांतरित करने का उसका आदेश भविष्य की उन सभी प्राथमिकी पर भी लागू होगा, जो उनके ट्वीट के आधार पर दर्ज की जा सकती हैं।
शीर्ष अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकियों को रद्द करवाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकता है।
पीठ ने याचिकाकर्ता जुबैर के ट्वीट के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज सभी छह मामलों में अंतरिम जमानत पर रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि गिरफ्तारी की शक्ति का कम से कम इस्तेमाल किया जाना चाहिए।
पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की उस गुहार को खारिज कर दिया, जिसमें जुबैर को भविष्य में कोई भी ट्वीट करने से रोकने का आदेश देने की गुजारिश की गई थी।
न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त महाधिवक्ता से पूछा,ह्लयह एक वकील से यह कहने जैसा है कि आपको बहस नहीं करनी चाहिए। हम एक पत्रकार से कैसे कह सकते हैं कि वह नहीं लिखेगा।ह्व इस पर राज्य के वकील ने कहा कि वह पत्रकार नहीं हैं।
पीठ ने कहा,ह्ल अगर कानून के खिलाफ कोई ट्वीट होता है तो वह जवाबदेह होगा। हम अग्रिम आदेश कैसे पारित कर सकते हैं कि कोई नहीं बोलेगा। हम यह नहीं कह सकते कि वह फिर से ट्वीट नहीं करेगा।ह्व
शीर्ष अदालत ने 18 जुलाई को उत्तर प्रदेश पुलिस को बुधवार 20 जुलाई तक जुबैर के खिलाफ कोई प्रारंभिक कार्रवाई नहीं करने को कहा था।
शीर्ष अदालत ने 12 जुलाई को जुबैर के खिलाफ सीतापुर में दर्ज मामले में दी गई अंतरिम जमानत को बढ़ा दिया था।
जुबैर के खिलाफ दिल्ली के अलावा उत्तर प्रदेश के हाथरस में दो, लखीमपुर खीरी, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और सीतापुर में एक-एक प्राथमिकी दर्ज की गई थीं।
दिल्ली पुलिस ने जुबैर को 27 जून को गिरफ्तार किया था और तब से वह न्यायिक हिरासत में था।