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संभावित ‘तीसरे’ की भूमिका जांचेंगे जांच अधिकारी

  • घूसखोर कनिष्ठ सहायक और दलाल को भेजा जेल
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    कोरोना वॉरियर को राज्य सरकार से मिलने वाली सहायता दिलाने के एवज में दो लाख रुपए की घूस लेते हत्थे चढ़े जिला कलक्ट्रेट के कनिष्ठ सहायक और दलाल को एसीबी हनुमानगढ़ की टीम ने बुधवार को श्रीगंगानगर स्थित एसीबी कोर्ट में पेश किया। यहां से मजिस्ट्रेट के आदेश पर दोनों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भिजवा दिया गया। उधर, अब जांच अधिकारी की ओर से इस मामले में संभावित ‘तीसरे’ अधिकारी-कर्मचारी की संलिप्तता का पता लगाया जाएगा। इसके बाद ही खुलासा होगा कि कनिष्ठ सहायक ने किसी अधिकारी के नाम पर रिश्वत की मांग की थी या नहीं। गौरतलब है कि एसीबी की हनुमानगढ़ इकाई को परिवादी की ओर से शिकायत दी गई थी कि उसके पिता की मृत्यु होने पर कोरोना वॉरियर को राज्य सरकार की ओर से देय 50 लाख रुपए की सहायता राशि की फाइल को प्रोसेस कर स्वीकृत करवाने के एवज में जिला कलक्ट्रेट कार्यालय के सहायता विभाग में कनिष्ठ सहायक के पद पर पदस्थापित सुभाष स्वामी की ओर से कुल राशि के 5 प्रतिशत कमीशन के रूप में 2 लाख 50 हजार रुपए रिश्वत राशि मांग कर परेशान किया जा रहा है। इस पर एसीबी जयपुर के उप महानिरीक्षक पुलिस सवाईसिंह गोदारा के सुपरविजन में एसीबी हनुमानगढ़ इकाई के एएसपी तेजपाल सिंह के निर्देशन में शिकायत का सत्यापन किया गया। मंगलवार को पुलिस निरीक्षक सुभाष चंद एवं टीम की ओर से ट्रैप कार्रवाई करते हुए कनिष्ठ सहायक सुभाष स्वामी पुत्र दयाराम स्वामी निवासी वार्ड 12, गांव मक्कासर को उसके दलाल जगरूप सिंह पुत्र श्री चनणसिंह निवासी वार्ड 11, सिक्खों की बस्ती, चिस्तियां, 1 जेडीडब्ल्यू, जंडावाली के माध्यम से परिवादी से 2 लाख रुपए रिश्वत राशि लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। एसीबी की टीम ने सबसे पहले कार सवार दलाल को लाल चौक के पास से दो लाख रुपए की रिश्वत राशि सहित पकड़ा। उसके बाद जिला कलक्ट्रेट से कनिष्ठ सहायक को गिरफ्तार किया। इसके बाद एसीबी के उपमहानिरीक्षक पुलिस सवाईसिंह गोदारा के निर्देशन में आरोपियों के निवास एवं अन्य ठिकानों की तलाशी शुरू की गई जो रात तक जारी रही। एसीबी की ओर से मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत प्रकरण दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। उधर, एसीबी की कार्रवाई से जिला कलक्ट्रेट परिसर में हड़कम्प मच गया। इस कार्रवाई के बाद यह चर्चा भी रही कि कनिष्ठ सहायक की ओर से किसी अधिकारी के नाम से रिश्वत मांगी गई थी।