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श्रद्धा हत्याकांड… आफताब ने अपनी जमानत याचिका वापस ली:वकील बोले- गलतफहमी के चलते लिया फैसला

नई दिल्ली. श्रद्धा वालकर हत्याकांड के आरोपी आफताब पूनावाल ने अपनी जमानत याचिका वापस ले ली है। आफताब और उनके वकील के बीच पैदा हुई गलतफहमी के बाद यह अर्जी वापस ली गई है। गुरुवार को वकील ने कोर्ट को बताया कि गलत जानकारी के कारण याचिका दायर की गई थी। वहीं, दिल्ली पुलिस ने कोर्ट में कहा कि आफताब को जमानत नहीं दी जानी चाहिए।

पढ़िए क्या है पूरा मामला
आफताब के वकील की तरफ से दिल्ली के साकेत कोर्ट में जमानत याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद जस्टिस वृंदा कुमारी ने कहा कि जब तक इस पर आफताब की सहमति नहीं होगी, तब तक यह अर्जी पेंडिंग रहेगी। यानी जमानत के लिए पहले आफताब की सहमति जरूरी है।

कोर्ट ने उसे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश करने के आदेश दिए। आरोपी को 17 दिसंबर को कोर्ट में पेश किया गया। जस्टिस वृंदा कुमारी ने आफताब से याचिका के बारे में बात की, जिसमें आफताब ने बताया कि उसने वकालतनामे पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन उसे नहीं पता था कि उसकी तरफ से जमानत याचिका दायर की गई है।

आफताब ने कोर्ट से कहा कि वह अपने वकील से मुलाकात करने के बाद तय करेगा कि उसे जमानत चाहिए या नहीं। गुरुवार को वकील ने आरोपी से करीब 1 घंटे की मुलाकात की। इसके बाद उसने याचिका वापस लेने का फैसला लिया।

श्रद्धा के पिता बोले- आरोपी के परिवार की भी जांच हो
श्रद्धा के पिता विकास वालकर ने कहा कि आफताब ने ही मेरी बेटी की नृशंस हत्या की है। आफताब को कड़ी से कड़ी सजा हो और उसके घरवालों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। जैसा मेरी बेटी के साथ किया उसको भी सजा मिलनी चाहिए। मैं चाहता हूं, उसे फांसी की सजा हो। जैसा मेरी बेटी के साथ हुआ ऐसा किसी के साथ ना हो।

उधर, श्रद्धा के पिता की वकील सीमा कुशवाहा ने कहा कि अभी तक चार्जशीट फाइल नहीं हुई है, लेकिन आफताब की जमानत अर्जी दाखिल हो गई। अर्जी आफताब की सहमति के बगैर दायर की गई थी। वकील को इस मामले में संवेदनशील होना चाहिए। उनके वकील को पहले मानवता के लिए खड़ा होना चाहिए था, फिर एक अपराधी के लिए। उन्होंने कहा कि 90 दिन के अंदर पुलिस चार्जशीट दाखिल करेगी। मुझे उम्मीद है कि जांच जल्द ही पूरी होगी।

8 मई को हुआ था श्रद्धा का मर्डर
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 28 साल के आफताब ने 18 मई को 27 साल की श्रद्धा का मर्डर कर दिया था। दोनों लिव-इन में रहते थे। आफताब ने श्रद्धा के शरीर के 35 टुकड़े किए थे। इन्हें रखने के लिए 300 लीटर का फ्रिज खरीदा था। वह 18 दिन तक रोज रात 2 बजे जंगल में शव के टुकड़े फेंकने जाता था।