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‘शाहरुख मुसलमान, इसलिए पठान का विरोध’:JLF में फिल्म समीक्षक ने कहा- फिल्मों से ज्यादा जूतों का मार्केट, बॉलीवुड में कोई क्रिएटिव माइंडसेट नहीं

जयपुर. जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के पहले दिन बॉलीवुड की ‘बुनियाद’ सेशन में फिल्म समीक्षक अजीत राय ने शाहरुख की फिल्म ‘पठान’ के विरोध को बेबुनियाद बताया। उन्होंने कहा- शाहरुख खान मुसलमान हैं, सिर्फ इसलिए उनकी फिल्म का विरोध किया जा रहा है। अगर वे मुस्लिम नहीं होते, तो यह विरोध नहीं होता। यह मैन्युफैक्चरर प्रोटेस्ट है, जिसका समर्थन मैं नहीं करता। मैं निजी रूप से, फिल्म क्रिटिक के रूप में फिल्म सेंसरशिप या किसी भी तरह की सेंसरशिप को नहीं मानता। दुनियाभर में क्रिएटिव सेंसरशिप कहीं नहीं है।

बॉलीवुड पिछड़ता जा रहा है
फिल्म समीक्षक अजीत राय ने कहा कि बॉलीवुड का कोई क्रिएटिव माइंडसेट नहीं है। यही कारण है कि बॉलीवुड पिछड़ता जा रहा है। यह सही है कि यहां सबसे कम पैसा लेखन और क्रिएटिव माइंडसेट पर खर्च किया जाता है। वैसे हम दुनियाभर में फिल्म बिजनेस की बात करें तो यूरोपियन मार्केट के मुकाबले हमारी जीडीपी 0.5 प्रतिशत है। पूरी बॉलीवुड इंडस्ट्री 5 हजार करोड़ रुपए की है। इससे बड़ी तो टीवी और न्यूज इंडस्ट्री है। लगभग 80 हजार करोड़ रुपए का टीवी मार्केट है। ​हमारी फिल्मों से ज्यादा जूतों का मार्केट है। यह भी 56 हजार करोड़ का है।

उन्होंने कहा- बॉलीवुड में सिलेक्शन सबसे बड़ी समस्या है। क्या करना चाहिए? इस पर ध्यान नहीं दिया जाता। पहले की बात करें तो हमारी इंडस्ट्री पूरी दुनिया में दिखाई जाती थी। ‘संगम’ जैसी फिल्में कई देशों में तीन साल तक चली। इसलिए इसे बॉलीवुड नाम दिया गया। आज यह बॉलीवुड नहीं है। हॉलीवुड में एक फिल्म 2000 करोड़ में बनती है और 5000 करोड़ तक कमाती है। ऐसे में उनकी एक फिल्म हमारी पूरी इंडस्ट्री के बराबर है।