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राम वनवास का दृश्य देख भावुक हुए दर्शक

  • सीता-राम विवाह देख लगे जय श्रीराम के जयकारे
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    जंक्शन स्थित दुर्गा मंदिर धर्मशाला में श्री रामलीला मंचन समिति के बैनर तले चल रही श्री रामलीला के चौथे दिन बुधवार रात्रि को कलाकारों की ओर से राम-सीता विवाह मंडप और राम वनवास के दृश्यों का मंचन किया गया। इससे पहले मुख्य अतिथि गुरु गोबिंदसिंह चैरीटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष बाबूलाल जुनेजा ने भगवान राम की आरती की और भगवान राम के चरित्र पर प्रकाश डाला। श्री रामलीला में अयोध्या से बारात का आगमन, महाराजा दशरथ और बारात की मिथिला नरेश जनक की ओर से अगवानी करना, विवाह मंडप में राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न और सीता, मांडवी, उर्मिला, श्रुतिकीर्ति का आगमन और वेद मंत्रों के साथ विवाह की रस्में हुर्इं। जब विदाई की बेला आई तो सभी की आंखें छलक पड़ीं। सीता-राम विवाह देख दर्शकों ने जय श्रीराम के जयकारे लगाए। इसके बाद राम वनवास के दृश्य का मंचन किया गया। यह दृश्य देख मौजूद दर्शक भावुक हो गए। रामलीला में कोप भवन में राजा दशरथ के बेहोश हो जाने के बाद कैकेयी ने राम को अंदर बुलाया और उन्हें बताया कि राजा दशरथ ने तुम्हें 14 साल के लिए वनवास जाने की आज्ञा दी है। इस पर राम ने राजा दशरथ की आज्ञा को स्वीकार करते हुए अपनी मां कौशल्या से वन जाने की आज्ञा मांगने गए। कौशल्या ने दुखी मन से राम को वन जाने की आज्ञा दे दी। तभी सीता भी कौशल्या के पास पहुंच गई और राम के साथ वन जाने की हठ करने लगी। कौशल्या व राम के बहुत समझाने के बाद भी जब सीता नहीं मानी तो राम उसे अपने साथ वन में ले जाने को तैयार हो गए। उसी समय लक्ष्मण भी वहां पहुंच गए और राम-सीता के साथ वन में जाने की हठ करने लगे। समिति के महासचिव बलजीत सिंह ने बताया कि रामलीला में चंद्र स्वामी पिछले 15 वर्षों से कैकयी का अभिनय कर रहे हैं। उनका अभिनय देख लोगों ने खूब तालियां बजाई। समिति के सचिव कपिल शर्मा ने बताया कि रामलीला के पांचवें दिन भरत-राम मिलाप के दृश्यों का मंचन होगा। इसके अलावा पंचवटी व सूपर्णखा की नाक काटने के दृश्य का भी मंचन होगा। समिति के निर्देशक प्रेम दायमा व गिरिराज शर्मा ने बताया कि समिति की ओर से 5 अक्टूबर को जिला कलक्ट्रेट के सामने दशहरा महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।