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मेरी लगी प्रीति नूं, दातेया तू बिल्कुल ना तोड़ीं

  • नामचर्चा में बजा राम नाम का डंका
  • धूमधाम से मनाया गया महा परोपकार माह, पांच परिवारों को राशन वितरित
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का 32वां गुरुगद्दीनशीनी माह (महा परोपकार माह) रविवार को धूमधाम से मनाया गया। इस उपलक्ष्य में जंक्शन स्थित नामचर्चा घर में आयोजित ब्लॉक स्तरीय नामचर्चा में कविराजों ने गुरुयश गाया। राम-नाम के गुणगान के साथ-साथ समाज कल्याण के लिए 142 मानवता भलाई के कार्य करने वाले डेरा सच्चा सौदा अनुयायी अपने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन गुरुगद्दीनशीनी माह (महा परोपकार माह) पर इंसानियत की सेवा कर सतगुरु के प्रेम में झूमते नजर आए। इस दौरान मौजूद साध-संगत ने अपने सतगुरु पर दृढ़ विश्वास बनाए रखने का संकल्प लिया। साथ ही पूज्य गुरुजी की पावन प्रेरणाओं पर चलते हुए मानवता भलाई के कार्य करने का प्रण लिया। पूज्य गुरुजी की ओर से चलाए गए 28वें मानवता भलाई कार्य ‘फूड बैंक’ के तहत जरूरतमंद परिवारों को राशन बांटा गया। पूज्य गुरुजी की ओर से भेजी गई 12वीं पावन चिट्ठी साध-संगत के बीच पढ़कर सुनाई गई। इससे पहले नामचर्चा की शुरुआत ब्लॉक भंगीदास गिरधारी इन्सां ने पवित्र नारा धन धन सतगुरु तेरा ही आसरा लगाकर करते हुए आई हुई साध-संगत को पावन महा परोपकार माह की बधाई दी। कविराज सुभाष दामड़ी इन्सां, सुभाष इन्सां, प्रेम इन्सां, रामदयाल इन्सां, मनोज इन्सां, नेमपाल इन्सां, सुखचन्द इन्सां ने नामचर्चा में मेरी लगी प्रीति नूं, दातेया तू बिल्कुल ना तोड़ीं सहित अनेकों रामनाम से प्रेरित भजनों का गुणगान किया। नामचर्चा में ब्लॉक जिम्मेवारों ने 142 मानवता भलाई के कार्यों पर भी प्रकाश डाला गया और इन कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के लिए साध-संगत को प्रेरित किया। इस दौरान ब्लॉक की पहली देहदानी कृष्णा देवी इन्सां की स्मृति में उनके परिवार की ओर से सात जरूरतमंद परिवारों को एक माह की राशन सामग्री वितरित की गई। नामचर्चा में ब्लॉक जिम्मेवारों के अलावा शाह सतनाम जी ग्रीन एस वेलफेयर फोर्स विंग के सेवादार, विभिन्न समितियों के जिम्मेवार, सुजान बहनें और साध-संगत मौजूद रही। गौरतलब है कि डेरा सच्चा सौदा की दूसरी पातशाही पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने 23 सितंबर 1990 को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां को अपना रूप बनाते हुए पावन गुरुगद्दी की बख्शिश की थी। इस पूरे महीने को साध-संगत पावन पर्व की भांति मानवता भलाई के कार्य कर मनाती है।