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भाजपा छलनी की तरह, इसके शासन में लीक हो रहा सब कुछ

  • जान-बूझकर सुनियोजित तरीके से बढ़ाई जा रही नफरत : सुभाषिनी अली
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    दलित, आदिवासी, अल्पसंख्यक दमन प्रतिरोध आंदोलन हनुमानगढ़ के बैनर तले गुरुवार को जंक्शन की व्यापार मण्डल धर्मशाला में साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति और जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जिला स्तरीय कन्वेंशन का आयोजन हुआ। कन्वेंशन को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि आज देश में नफरत और शक बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। लोग कहते हैं कि यह तो पहले भी था। लेकिन हमारे समाज में पहले नफरत नहीं थी। यह नफरत जान-बूझकर बढ़ाई जा रही है। दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में राज कर रहे भाजपा से जुड़े आरएसएस के संगठन जान-बूझकर सुनियोजित तरीके से नफरत बढ़ाने का काम कर रहे हैं। इसके कई उदाहरण देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि हनुमानगढ़ जिले की ही बात करें तो भादरा क्षेत्र में किसी ने पुलिस को शिकायत कर दी कि ईद पर कुछ मुसलमान गाय को काटकर उसका मांस पका रहे हैं। पुलिस ने शिकायत पर कार्रवाई करते हुए कुछ मुसलमान लोगों को गिरफ्तार कर लिया। मांस को जांच के लिए भेज दिया। इसी बीच आरएसएस का एक आदमी अलग से मीट लेकर पुलिस के पास जाता है और उस मीट को भी पुलिस ले लेती है। उस मीट की जांच भी तत्काल हो गई। जांच में गाय का मांस होने की बात सामने आई। यह मामला सामने आने के बाद आग लग गई। धरने-प्रदर्शन हुए। कर्फ्यू तक लगा। लेकिन मुसलमानों से बरामद हुए मीट की रिपोर्ट बाद में आई। रिपोर्ट में वह मांस बकरे का निकला। अब उन मुसलमानों को जमानत मिल गई। पूर्व सांसद सुभाषिनी अली ने कहा कि भाजपा छलनी की तरह है। इसके शासन में सब कुछ लीक होता रहता है। सारे पेपर लीक हो जाते हैं और युवाओं को नौकरी नसीब नहीं होती। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में पेपर लीक हो गया। वहां के तीन मीडियाकर्मियों ने इसकी खबर प्रकाशित कर दी कि पेपर लीक करने वाले विधायक व विधायक के रिश्तेदार हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि पुलिस ने उन तीनों मीडियाकर्मियों के कपड़े उतरवाकर उन्हें पूरे शहर में घूमाया और जेल में डाल दिया। उनकी जमानत पर सुनवाई नहीं हुई। लेकिन शहर के लोगों ने उनके पक्ष में धरना दिया। उसके बाद वे तीनों जमानत पर छूटे। आज भी इन जैसे कुछ मीडियाकर्मी ऐसे हैं जो सच्चाई सामने लाने का काम करते हैं। सुभाषिनी अली ने कहा कि तीन कृषि कानूनों के खिलाफ करीब साल भर चले आंदोलन के दौरान कई किसान दिल्ली के बॉर्डर पर आंदोलन करते समय मर गए। लेकिन उनके लिए बोलने के लिए प्रधानमंत्री के पास एक शब्द भी नहीं था। लेकिन जब उत्तर प्रदेश में चुनाव होने थे, उस समय पीएम ने टीवी पर आकर कहा कि मुझसे गलती हो गई कि वह उन्हें समझा नहीं पाया। मैं तीनों कानून वापस लेता हूं। कानून तो वापस ले लिया लेकिन फिर भी किसानों को उसकी फसल का सही दाम नहीं मिल रहा। फसल की लूट हो रही है। किसान जब अपनी उपज लेकर मंडी में पहुंचता है तो पता चलता है कि उसकी फसल को सही दाम में खरीदने वाला कोई नहीं है। सरकार ने फसल खरीदनी बंद कर दी है। बड़े-बड़े व्यापारियों को यह काम सौंप दिया है। इन सब कारणों से किसानों की आत्महत्या की घटनाएं कम होने की बजाए बढ़ रही हैं। खेत मजदूर भी आत्महत्या करने को मजबूर हैं। पिछले दो-तीन सालों में एक लाख खेत मजदूरों ने आत्महत्या कर ली। शहर का दिहाड़ी मजदूर भी आत्महत्या कर रहा है। पूर्व सांसद ने कहा कि आज हालात यह हो गए हैं कि अगर किसी के दाढ़ी है और उसके पास गोश पकड़ा जाए तो उसकी हत्या कर दी जाती है। लेकिन अगर कोई आरएसएस का आदमी है और गाय का गोश लेकर घूम रहा है तो वह साधु-महात्मा बन जाता है। इस देश में यह कैसा अन्याय है। उन्होंने कहा कि अगर आज जिले में ईमानदार अधिकारी न होते, अगर कोर्ट ने सही फैसला न दिया होता तो भादरा के प्रकरण को लेकर आज हनुमानगढ़ में कर्फ्यू होता। लोग एक-दूसरे का गला काट रहे होते। सारा व्यापार, सारा धंधा ठप हो गया होता। उन्होंने कहा कि इन हालातों के बीच आज इस सच्चाई को जानने की जरूरत है कि यह नफरत सोच-समझकर सुनियोजित तरीके से फैलाई जा रही है। आज यह नफरत इंग्लैंड पहुंच चुकी है। वहां दंगा होते-होते बचा। उन्होंने कहा कि एक तरफ नफरत फैलाई जा रही है तो दूसरी तरफ गरीबी, बेरोजगारी यानि लोगों की तबाही बन रही है। आज हमारी जान व बच्चों का भविष्य खतरे में है। समाज का आगे क्या होगा, इस बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। हमारे खिलाफ बहुत बड़ी साजिश रची जा रही है। हम सभी को एकजुट होकर उस साजिश को नाकाम करने व अपने समाज को आगे बढ़ाने की लड़ाई लड़नी होगी। कन्वेंशन में सीटू के राज्य उपाध्यक्ष रामेश्वर वर्मा, अखिल भारतीय किसान सभा के संयुक्त सचिव डॉ. संजय माधव, रघुवीर सिंह वर्मा, बहादुर सिंह चौहान, चन्द्रकला वर्मा, गुरपरविन्द्र सिंह मान, जगजीत सिंह जग्गी आदि शामिल थे।