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बदरुद्दीन अजमल का बयान, अपने पूर्वजों को बताया हिंदू

नई दिल्ली। असम के लोकसभा सांसद और आॅल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के प्रमुख मौलाना बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि उनके पूर्वज हिंदू थे। यह बयान आने वाले ईद समारोह में गायों की बलि नहीं देने की उनकी अपील के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर विवाद के बाद आया है। कई मुस्लिम नेताओं ने अजमल की अपील का विरोध किया है और उन्हें बीजेपी का एजेंट बताया है। अजमल ने असम के मुसलमानों से अपील की है कि ‘हिन्दुओं की भावनाओं का सम्मान करते हुए’ वे 10 जुलाई को ईद-उल-अधा के दौरान गायों की कुबार्नी (बलिदान) न करें।
दरअसल, असम के मुस्लिम नेता और सांसद बदरुद्दीन अजमल ने कहा कि भारत में सभी हिंदू थे। हिंदुओं के एक छोटे समूह के अत्याचारों के कारण, मेरे पूर्वजों को खुद को इस्लाम में परिवर्तित करना पड़ा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें धर्मांतरण के लिए मजबूर नहीं किया गया था।
अजमल ने गुरुवार को गुवाहाटी में मीडियाकर्मियों से बात करते हुए कहा, आरएसएस के कुछ लोग हिंदू राज बनाने की कोशिश करके हिंदुस्तान को खत्म करना चाहते हैं। उनके सपनों में भी हिंदू राज कभी हकीकत नहीं होगा, वे इस देश में मुसलमानों और हिंदुओं के बीच की एकता को नहीं तोड़ सकते। ईद में एक दिन भी गाय न खाने से तुम मरोगे नहीं, बल्कि हम हिन्दू भाईयों के साथ मनाते हैं, हमारे पूर्वज सभी हिंदू थे, वे इस्लाम में आए थे क्योंकि इसमें विशेष गुण हैं, यानी दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना।
अजमल ने कहा, हिंदुओं का सनातन धर्म गाय को मां मानता है और उसकी पूजा करता है। हमें उनकी धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए। इस्लामी मदरसे दारुल उलूम देवबंद ने 2008 में एक सार्वजनिक अपील की थी कि बकरीद पर गाय की कुबार्नी न दी जाए और उसने यह बताया था कि इस बात का कोई उल्लेख या अनिवार्यता नहीं है कि गाय की ही बलि देनी होगी।
इससे पहले अजमल ने कहा था कि ईद-उज-अजहा के दौरान ऊंट, बकरी, गाय, भैंस और भेड़ जैसे अन्य जानवरों की बलि दी जा सकती है। उन्होंने कहा, चूंकि अधिकतर लोग गाय को पवित्र मानते हैं, तो मैं लोगों से गाय की कुबार्नी नहीं देने और किसी अन्य जानवर की बलि देने का विनम्र आग्रह करता हूं।