Thursday, February 2निर्मीक - निष्पक्ष - विश्वसनीय
Shadow

फिर बेबी पाउडर बेच सकेगा जॉनसन:बॉम्बे हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के आदेश को किया रद्द

नई दिल्ली. बॉम्बे हाईकोर्ट ने जॉनसन एंड जॉनसन (J&J) को राहत देते हुए कंपनी को उसके मुलुंड प्लांट में बनने वाले बेबी पाउडर को बेचने की अनुमति दे दी है। जॉनसन के बेबी पाउडर मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस को महाराष्ट्र सरकार ने कैंसिल कर दिया था। इस फैसले को कंपनी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि कॉस्मैटिक्स प्रोडक्ट्स की क्वालिटी और सेफ्टी स्टैंडर्ड को बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी एक प्रोडक्ट में मामूली कमी होने पर पूरी मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को बंद करना उचित नहीं है।

नवंबर में दिए थे जांच के आदेश
इससे पहले नवंबर महीने में हाईकोर्ट ने J&J के बेबी पाउडर सैंपल की फिर से जांच करने के आदेश दिए थे। जॉनसन के बेबी पाउडर मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस को महाराष्ट्र सरकार ने कैंसिल कर दिया था। इसके आदेश 15 और 20 सितंबर को दिए थे। पहले आदेश में मुलुंड प्लांट में बेबी पाउडर बनाने का लाइसेंस कैंसिल किया गया था। दूसरे आदेश में मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन रोकने को कहा गया था। हाईकोर्ट इन आदेशों के खिलाफ कंपनी की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये फैसला सुनाया है।

2018 में सैंपल लिए, 2019 में रिपोर्ट आई थी
दिसंबर 2018 में एक औचक निरीक्षण के दौरान FDA ने क्वालिटी चेक के लिए पुणे और नासिक से J&J के टैल्क-आधारित बेबी पाउडर के सैंपल लिए थे। इनमें मुलुंड प्लांट में बने सैंपल को ‘स्टैंडर्ड क्वालिटी का नहीं’ माना गया था।

2019 में आए टेस्ट के रिजल्ट में कहा गया था कि ‘सैंपल IS 5339: 2004 (सेकेंड रिवीजन अमेंडमेंट नंबर 3) टेस्ट pH में शिशुओं के लिए त्वचा पाउडर के स्पेसिफिकेशन का अनुपालन नहीं करता है।’ बाद में, कंपनी को ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत कारण बताओ नोटिस दिया गया था।

कंपनी को रोजाना 2.5 करोड़ का नुकसान
कंपनी ने अपनी याचिका में कहा था कि फरवरी, मार्च और सितंबर 2022 के 14 रैंडम बैचों का एक इंडिपेंडेंट टेस्टिंग लेबोरेटरी ने टेस्ट किया था। सभी निर्धारित पीएच मानक के भीतर ठीक पाए गए। कंपनी ने कहा कि वह पिछले 57 साल से मुलुंड प्लांट में बेबी पाउडर बना रही है। J&J का लाइसेंस जनवरी 2020 में रिन्यू किया गया था। कंपनी ने दावा किया कि लाइसेंस रद्द होने के कारण उसे रोजाना 2.5 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है।

टैल्क से कैंसर का खतरा
टैल्क से कैंसर के खतरे के आरोप लगते रहे हैं। दरअसल, जहां से टैल्क को माइन करके निकाला जाता है, वहीं से एस्बेस्टस भी निकलता है। एस्बेस्टस (अभ्रक) भी एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला सिलिकेट मिनरल है। ये शरीर को नुकसान पहुंचाता है। जब टैल्क की माइनिंग की जाती है तो उसमें एस्बेस्टस के भी मिलने का खतरा रहता है।