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प्राचीन गुरुद्वारा की ऐतिहासिकता से रूबरू हुए बच्चे

  • गुरुद्वारा शहीद बाबा सुखासिंह बाबा महताब सिंह का किया भ्रमण
    हनुमानगढ़ (सीमा सन्देश न्यूज)।
    लिटिल हार्ट पब्लिक सीनियर सेकेंडरी स्कूल के बच्चों को शनिवार को टाउन स्थित ऐतिहासिक-प्राचीन गुरुद्वारा शहीद बाबा सुखासिंह बाबा महताब सिंह का भ्रमण करवाया गया। बच्चों ने शाला स्टाफ के साथ गुरुद्वारा साहिब पहुंचकर सर्वप्रथम माथा टेका। इसके बाद गुरुद्वारा साहिब के इतिहास से बच्चे रूबरू हुए। उन्हें यहां हर साल लगने वाले सालाना शहीदी जोड़ मेले की जानकारी दी गई। स्कूल निदेशक विकास गोयल ने बच्चों को बताया कि सुखासिंह महताबसिंह गुरुद्वारा उन वीर योद्धाओं की याद दिलाता है, जिन्होंने एक दुष्ट खुंखार व्यक्ति की गर्दन काट कर गुरु साहिब की आज्ञा की पालना की थी। हनुमानगढ़ का ऐतिहासिक गुरुद्वारा सिख समुदाय का ही नहीं, बल्कि देश के हर नागरिक का सीना चौड़ा कर रहा है। उन्होंने बताया कि सन् 1741 में अमृतसर स्थित स्वर्ण मंदिर में मुगल फौज का कमांडर मस्सा रंगड़ अनैतिक कार्य करवा रहा था। उसके इन कार्यांे की खबर बीकानेर के पास रहने वाले बाबा सुखासिंह और बाबा महताब सिंह तक पहुंच गई। इस पर यह दोनों वीर योद्धा मुगल अफसरों के भेष में मस्सा रंगड़ के कैंप तक पहुंचकर उसकी गर्दन काटकर वापस बीकानेर पहुंचे। रास्ते में इन दोनों सूरमाओं ने हनुमानगढ़ स्थित एक पेड़ के नीचे विश्राम किया था। इसी जगह पर शहीद बाबा सुखासिंह बाबा महताब गुरुद्वारा बनवाया गया। स्कूल निदेशक ने बताया कि बच्चों को इस तरह के स्थलों का भ्रमण करवाने का मुख्य उद्देश्य उन्हें सभी धर्मांे के धार्मिक स्थलों के बारे में जानकारी प्रदान करना है। विद्यालय की ओर से सर्वधर्म सद्भाव की भावना को प्रेरित करते हुए गुरुनानक देवजी की जयंती के उपलक्ष्य में बच्चों को गुरुद्वारा साहिब का भ्रमण करवाया गया है। बच्चों ने लंगर भी ग्रहण किया।