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पानी की हो रही बंदरबांट:IGNP में चालीस करोड़ रुपए की लागत से बनी केजेडी नहर, मोघों को ऊंचा नीचा कर दिया अपनों को पानी

बीकानेर. खाजूवाला की अनूपगढ़ शाखा से निकल रही केजेडी नहर पर सरकार ने पिछले दिनों ही 40 करोड़ रुपए खर्च कर मरम्मत करवाई ताकि टेल पर बैठे किसान को पानी मिल सके। हकीकत ये है कि चालीस करोड़ रुपए तो खर्च हो गए लेकिन बड़ी संख्या में किसानों को पानी आज भी नहीं मिल रहा है। अब परेशान किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया है। नहर के माइनर में मोघों को ऊंचा नीचा करके पानी का असमान वितरण किया जा रहा है।

दरअसल, केजेडी माइनर पर किसानों को पानी देने के लिए इसे बनाया गया लेकिन इसका सही उपयोग अब तक शुरू नहीं हो पाया है। परेशान किसान नहर विभाग के अधिकारियों के चक्कर लगाते लगाते हुए नजर आ रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। ऐसे में अब परेशान हुए किसानों ने खाजूवाला एसडीएम श्योराम को आरडी 146 पर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने की चेतावनी दे दी है। किसानों का आरोप हैं कि नहर विभाग ने कुछ जगह मोघे नीचे कर दिए है और अधिकांश जगह मोघे जरूरत से ज्यादा पानी ले रहे है। मगर सिंचाई विभाग धरातल पर जाकर जांच नही कर रहा हैं, जिससे किसानों को सिंचाई का तो दूर पीने का पानी भी मुश्किल से नहीं पहुंच रहा हैं। ज्ञापन में किसान नेता मदनलाल गोदारा व रामकुमार गोदारा के नेतृत्व में किसानों ने खाजूवाला एसडीएम श्योराम को ज्ञापन सौंपकर अंतिम छोर की टेल पर पूरा पानी करने की मांग की हैं। किसानों का आरोप हैं कि नहर विभाग की लापरवाही किसान भुगत रहे है क्योंकि केजेड़ी नहर का पूर्ण निर्माण होकर नवीनीकरण पर 40 करोड़ रूपये लगे है। फिर भी अंतिम छोर पर पहले से हालात खराब हो गए है। अधिकारियों की सांठगांठ से कुछ किसानों को पानी देने के लिए मोघे ऊंचे कर दिए गए हैं तो कई जगह नीचे रखे गए हैं। इससे पानी का असमान वितरण हो रहा है। हालात ये है कि कुछ क्षेत्रों में तो पहले जितना पानी भी नहीं पहुंच रहा है। किसानों की मांग हैं कि कमेटी बनाकर पूरे माईनर व मोघों की निष्पक्ष जांच करवाई जानी चाहिए। जहां भी गड़बड़ मिलती है, उन मोघो को ठीक किया जाए।