Wednesday, February 1निर्मीक - निष्पक्ष - विश्वसनीय
Shadow

दर्दनाक थे परवीन के आखिरी कुछ दिन:भूख से मरीं, 3 दिनों तक बंद कमरे में सड़ती रही लाश, अंतिम संस्कार में भी नहीं था परिवार

तारीख- 22 जनवरी 2005

जगह- एज रिवेरा बिल्डिंग, 7वीं मंजिल, जुहू, मुंबई

एक अपार्टमेंट के दरवाजे के बाहर अखबार और दूध के पैकेट तीन दिनों से इकट्ठा होते जा रहे थे। दरवाजे पर ना ताला डला था और ना ही अंदर से पिछले तीन दिनों से कोई बाहर निकला। जब पड़ोसी इकट्ठा हुए तो उन्हें संदेह हुआ। दरवाजे के पास गए तो सड़न की बदबू से ज्यादा देर वहां रुक नहीं सके। स्थिति संदिग्ध थी तो पड़ोसियों ने पुलिस को कॉल कर जानकारी दी।

पुलिस पहुंची, दरवाजा खटखटाया तो कोई जवाब नहीं मिला और फिर जब दरवाजा तोड़कर पुलिस अंदर पहुंची तो रोंगटे खड़े कर देने वाला मंजर आंखों के सामने था।

अपने जमाने की सबसे खूबसूरत और पॉपुलर एक्ट्रेस परवीन बाबी की लाश बिस्तर पर पड़ी थी, लेकिन पहचानने लायक नहीं थी। शरीर सड़ रहा था और कमरे में इतनी दुर्गंध थी कि कोई सांस नहीं ले पा रहा था।

कमरा पूरी तरह बेतरतीब था और बिस्तर के पास एक व्हीलचेयर पड़ी थी। परवीन बाबी की मौत उनकी लाश मिलने के 72 घंटे पहले ही हो चुकी थी। ना कोई रिश्तेदार था, ना दोस्त, ना कोई खबर लेने वाला।

भूख से हुई मौत, पोस्टमॉर्टम में शरीर में नहीं मिले खाने के ट्रेसेस

परवीन बाबी के शव को पोस्टमॉर्टम के लिए मुंबई के कूपर अस्पताल ले जाया गया।

रिपोर्ट में उनके शरीर में खाने का एक कतरा भी नहीं मिला था। परवीन बाबी कई दिनों से भूखी थीं, लेकिन उनके शरीर में अल्कोहल मिला था। रिपोर्ट में सामने आया कि परवीन ने मरने से 3-4 दिन पहले तक कुछ खाया नहीं था।

भूख से ही उनके शरीर के कई अंग काम करना बंद कर चुके थे।

परवीन के शरीर में सबसे ज्यादा सड़न उनके पैर में थी। पैर की उंगलियां काली पड़ चुकी थीं, गैंग्रीन का कारण उनकी हाई शुगर थी।

पैर सड़ने के कारण परवीन बाबी शायद चल नहीं पाती थीं, यही कारण था कि उनके बिस्तर के पास एक व्हीलचेयर मिली थी।

अधूरी मोहब्बत के बावजूद अंतिम संस्कार में पहुंचे महेश, डैनी, कबीर

23 जनवरी 2005, कूपर अस्पताल में परवीन बाबी का पोस्टमॉर्टम हो चुका था, लेकिन कोई रिश्तेदार उनके शव को क्लेम करने अस्पताल नहीं पहुंचा। लाश मिले दो दिन हो चुके थे, लेकिन फिर भी कोई खबर लेने नहीं पहुंचा। आखिरकार फिल्ममेकर महेश भट्ट उनका शव लेने अस्पताल पहुंचे, जो एक समय परवीन की मानसिक स्थिति बिगड़ने के बावजूद उनके लिए अपना परिवार छोड़ आए थे। महेश ने ही परवीन के अंतिम संस्कार का बंदोबस्त किया।

मौत से चंद महीनों पहले परवीन क्रिश्चियन हो चुकी थीं और उनकी ख्वाहिश थी कि उनका अंतिम संस्कार क्रिश्चियन रीति-रिवाजों से हो, लेकिन उनके मुस्लिम रिश्तेदारों ने इसका विरोध किया और उन्हें मुस्लिम रीति-रिवाजों से जुहू के सांताक्रूज कब्रिस्तान में दफनाया गया।

70-80 के दशक की सबसे खूबसूरत और ग्लैमरस एक्ट्रेस समझी जाने वाली परवीन बाबी के लाखों चाहने वाले रहे। ये पहली बॉलीवुड स्टार थीं, जिन्हें इंटरनेशनल टाइम मैगजीन के कवर पेज पर जगह मिली थी। अमर अकबर एंथोनी, शान, नमक हलाल, कालिया जैसी दर्जनों बेहतरीन फिल्मों में नजर आईं परवीन की आखिर इतनी दर्दनाक स्थिति में मौत कैसे हुई? वजह थी एक लाइलाज बीमारी पैरानॉइड सिजोफ्रैनिया, जिससे परवीन अमिताभ बच्चन, बिल क्लिंटन, प्रिंस चार्ल्स, जॉन एफ कैनेडी तक को अपनी जान का दुश्मन समझने लगी थीं। कई बार तो ऐसा भी हुआ जब चलती शूटिंग के दौरान परवीन ने अमिताभ पर जान लेने की कोशिश करने के संगीन आरोप लगाए और फिर कभी अचानक सेट से गायब हो गईं।

परवीन बाबी की जिंदगी की कहानी शुरुआत में परीकथा जैसी रही, लेकिन फिर जब बिगड़ी तो हर किसी ने उनका तमाशा बनते देखा। महेश भट्ट, डैनी डेनजोंगपा, कबीर बेदी इनकी जिंदगी की किताब का खूबसूरत पन्ना रहे जरूर, लेकिन परवीन ने उनसे भी दूरी बना ली।