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घग्घर नदी में जलस्तर बढ़ा,प्रशासन अलर्ट

सिरसा (वार्ता)। हरियाणा के पंचकुला जिले से सटती शिवालिक की पहाडि?ों,पंजाब व हरियाणा के अन्य हिस्सों में ठहर-ठहर कर हो रही बारिश के बाद घग्घर नदी में जलस्तर बढ़ गया है। करीब 421 कि लोमीटर लंबी इस नदी का कुल कैचमेंट एरिया 21,580 वर्ग किलोमीटर है। सिरसा के ओटू हैड पर शनिवार को 20 हजार क्यूसेक पानी का बहाव अंकित किया गया। अगले 24 घंटों में ओटू हैड में करीब पांच हजार क्यूसेक पानी और आने की संभावना विभाग जता रहा है। ऐसे में प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट हो गया है। घग्घर नहरी मंडल के अधिकारी लगातार तटबंधों का निरीक्षण कर रहे हैं। विभागीय कर्मचारियों व तटबंधों से सटते गावों के लोगों को 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दे दिए गए हैं।
घग्घर नहरी मंडल के अधिशाषी अभिंयता अजीत हुड्डा ने बताया कि गुहला चीका हैड पर 20500 क्यूसिक,चांदपुर हैड पर 10500 क्यूसेक व सरदूलगढ़ ब्रिज पर 25हजार क्यूसेक पानी बहाव चल रहा है। देर रात्री तक ओटू हैड में पांच हजार क्यूसेक पानी ओर बढ़ सकता है। ओटू हैड पर पानी के बढ़ते बहाव के बाद राजस्थान को दस हजार क्यूसिक पानी छोड़ दिया गया है। जल बहाव में बाधा न बने इसलिए कैली को साथ-साथ मशीनों द्वारा निकाला जा रहा है। राजस्थान के हनुमानगढ़,सूरतगढ़,अनूपगढ़ होते हुए यह नदी पाकिस्तान क्षेत्र में प्रवेश कर जाती है। इसके अलावा ओटू हैड से निकाले गए बरसाती नालों में भी पानी छोड़ दिया गया है जिसका उपयोग नदी के तटंबधों से दूर के खेतों के किसान उपयोग में लाते हैं। संबधित विभाग फि लहाल अभी बाढ़ का खतरा तो नहीं मान रहा है, लेकिन प्रशासन अपनी तरफ से पूरी तरह अलर्ट है। सिरसा में नदी से कुछ दूरी पर वायुसेना का बेस होने के कारण शासन व प्रशासन जल बहाव को हल्के में नहीं लेता। वायुसेना केंद्र से जुड़ी विंग भी बढ़ते जलस्तर पर निगाह रखे हुए हैं। ओटू हैड में 25 से 30 हजार क्यूसेक पानी तक कंट्रोल करने की क्षमता है, लेकिन इससे ज्यादा पानी आने पर खतरा बहुत बढ़ जाएगा। अबकी बार इसकी क्षमता को बढ़ाने के लिए खुदाई भी आरम्भ की गई मगर इस बीच बारिश शुरू होने से ज्यादा मिट्टी नहीं निकल पाई। शनिवार को जलस्तर बढ?े के बाद घग्घर के तटबंधों तक पहुंच गया है। घग्घर तटबंधों के भीतरी क्षेत्र में धान व अन्य फसलें पानी में डूब गई हैं। किसान इस क्षेत्र में फसल अपने रिस्क पर लगाते हैं। प्रशासन की ओर से घग्घर से सटे ग्रामीण इलाकों में ग्रामीणों से अपील की गई है कि वे घग्घर के तटबंधों पर पहरा लगाना शुरू क र दें। किसी भी जगह तटबंध में कोई कमी नजर आए तो तुरंत इसकी सूचना प्रशासन को दें ताकि समय पर दूर कर तटबंध को मजबूत कि याजा सके।
श्री हुड्डा ने बताया कि तटबंधों के पास नहरी विभाग ने 18 टीमें तैनात की है, जो 24 घंटे निगरानी कर रही है। मल्लेवाला में मिट्टी के थैले भेजे गए हैं। करीब 20 हजार थैले विभाग के पास रिजर्व हैं और इन्हें तटबंधों के पास रखा गया है ताकि जरूरत के समय तुरंत इन्हें उपयोग में लाया जा सके ।
उधर,घग्घर नदी के तटबंधों से सटते गांव मल्लेवाला,बुढ़ाभाणा,फरवाईं,किराड़कोट व सहारनी के किसानों का कहना है कि समय रहते विभाग द्वारा बाढ़ बचाव प्रबंधन पर संजीदगी से कार्य नहीं किया जाता। कुछ किसान जल बहाव क्षेत्र में भी नियमों को ताक पर रखकर फसल बुवाई करते हैं इसके अलावा बगैर विभाग की अनुमति के नदी से खेतों के लिए जगह-जगह पाईप भी दबाई हुई हैं जिनसे हर समय तटबंध टूटने की संभावना बनी रहती है। नदी के तटबंध कमजोर हैं,तटबंधों पर उगी पहाड़ी कीकर एवं चूहे बाढ़ की संभावना को बल देते हैं। जितने दिन नदी में जलस्तर रहेगा गावों में किसान संभावित खतरे को लेकर दुविधा में रहेंगे। ग्रामीणों ने नदी के तटबंधों को पक्का करने की शासन व प्रशासन से मांग की है।