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गहलोत फिर बने कांग्रेस के संकटमोटक, दिग्विजय सिंह को चुनाव नहीं लड़ने के लिए किया तैयार

जयपुर
राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत कांग्रेस के एक बार फिर संकट मोचक बने हैं। चर्चा है कि सीएम गहलोत ने कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं लड़ने के लिए मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह तैयार किया है। गहलोत के कहने पर ही दिग्विजय सिंह ने ऐन वक्त पर चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी। इससे पहले दिग्विजय सिंह ने नामांकन दाखिल करने लिए फाॅर्म भी ले लिया था। उनके चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोरों से चल रही थी। लेकिन गहलोत के इंकार के बाद मल्लिकार्जुन खड़गे रेस में शामिल हो गए।  कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव लड़ने से इंकार कर चुके सीएम गहलोत ने मल्लिकार्जुन खड़गे के समर्थन में खुलकर किया है। गहलोत खड़गे के प्रस्तावक भी बने है। खड़गे से उनके घर पर मुलाकात के बाद गहलोत ने मीडिया को कहा कि खड़गे अनुभवी नेता हैं और लगातार चुनाव जीतते रहे हैं। आपको बता दें कांग्रेस अध्यक्ष  के चुनाव के लिए वरिष्ठ कांग्रेस नेता खड़गे और थरूर के बीच मुकाबला होगा। 

गहलोत बोले- खड़गे का चुनाव लड़ना सही

सीएम गहलोत ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में खड़गे ने चुनाव लड़ने का जो फैसला लिया है वह सही है। हम इसका स्वागत करते हैं। हम सब सीनियर नेताओं ने मिलकर उनके समर्थन का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि मेरे लिए पद नहीं पार्टी महत्वपूर्ण है। गहलोत ने कहा कि हमारे वरिष्ठ नेताओं ने मिलकर खड़गे के कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए नामांकन के संबंध में निर्णय लिया है। मैं उनके लिए प्रस्तावक बना हूं। हम कांग्रेस को मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। 

कांग्रेस तकलीफ में है, भागना जानता नहीं

इससे पहले मीडिया से बात करते हुए सीएम गहलोत ने दिल्ली में कहा कि कांग्रेस आलाकमान जो मुझे कहेगा वह मैं करूंगा। प्रमुख विपक्ष की भूमिका निभाने में कांग्रेस कामयाब हो, इसके लिए अनुभव का लाभ मिले, इसका प्रयास करेंगे। कांग्रेस कैसे मजबूत हो, इसके लिए मैं जान लगाना चाहता हूं। मेरा बस चले तो मैं कोई भी पद ना लूं। अभी पार्टी तकलीफ में है। तकलीफ में मैं भागना जानता नहीं। देश में मजबूत विपक्ष होना बहुत जरूरी है। कांग्रेस को मजबूती प्रदान करने के लिए राहुल गांधी निकल पड़े हैं। कांग्रेस को मजबूत करने के अभियान में राहुल गांधी के साथ हूं। सोनिया गांधी का फैसला मेरे लिए सबसे पहले। 50 साल के राजनीति करियर में यही स्टैंड रहा है। गांधी परिवार के वफादार सिपाकी के तौर पर उनके सुख दुख में साथ खड़े रहना।