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कांग्रेस प्रभारी रंधावा बोले- सर्वे के आधार पर मिलेंगे टिकट

  • गहलोत-पायलट विवाद पर कहा-मैं फाइव स्टार में नहीं,लोगों के बीच बैठा हूं,विवाद सुलझाना मेरा काम
    जयपुर।
    राजस्थान कांग्रेस में सीएम अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के बीच चल रहे सियासी कोल्ड वॉर पर एक बार फिर चचार्एं तेज हो गई हैं। कल देर रात मंत्रियों की फीडबैक बैठक में गहलोत-पायलट विवाद सुलझाने के सुझाव के बाद अब प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने जल्द विवाद सुलझाने का दावा किया है। गहलोत-पायलट के बीच विवाद निपटाने के मंत्रियों के सुझाव के सवाल पर रंधावा ने कहा- विवाद सुलझाने का काम मेरा है, उनका नहीं है। मैं फाइव स्टार में नहीं बल्कि लोगों के बीच बैठा हूं। विवाद भी सुलझा लेंगे। रंधावा जयपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
    रंधावा ने कहा- मेरा पहला काम संगठन को मजूबत करना है और उस दिशा में हम सब काम कर रहे हैं। संगठन की खाली पड़ी नियुक्तियों को जल्द भर दिया जाएगा। मैं लगातार दो दिन से नेताओं—कार्यकतार्ओं के बीच बैठकर उनसे बात कर रहा हूं। फीडबैक के दौरान किसी की भी बहुत बड़ी शिकायत नहीं मिल है, छोटी मोटी चीजें चलती रहती हैं।
    रंधावा ने कहा- विधानसभा चुनाव में टिकट सर्वे के आधार पर मिलेंगे। अभी हम किसी को टिकट नहीं बांट रहे हैं। टिकट से पहले हम सर्वे करवाएंगे और फिर उसके रिजलट के आधार पर ही टिकट तय होगा। सर्वे के टाइम पर रंधावा ने कहा कि सर्वे तो जारी है। अभी किसी को टिकट नहीं दे रहे हैं लेकिन सर्वे करवा रहे हैं और जिनका नंबर सर्वे में आएगा वही टिकट के हकदार होंगे।
    ढाई साल से संगठन के पदों पर नियुक्तियां नहीं होने के सवाल पर रंधावा ने कहा कि अगले दो दिन में आपको ब्लॉक और जिलाध्यक्षों की नियुक्ति की लिस्ट मिल जाएगी। सब काम होंगे। रंधावा ने जल्द सभी खाली पदों पर नियुक्तियां करने का दावा किया है।
    कांग्रेस में 15 जुलाई 2020 के बाद से ब्लॉक, जिले बिना पदाधिकारियों के चल रहे हैं। पायलट खेमे की बगावत के समय भंग किए गए संगइन के पदों पर अब तक नियुक्तियां नहीं हुई हैं। केवल 39 प्रदेश पदाधिकारी और 13 जिलाध्यक्षों को छोड़कर संगठन में ढाई साल से पदाधिकाारी नहीं हैं।
    कांग्रेस में कांग्रेस में 400 ब्लॉक अध्यक्ष, 26 जिलाध्यक्ष, 2200 मंडल अध्यक्षों के पद खाली चल रहे हैं। इन सबको मिलाकर मोटे तौरपर 2500 के आसापास नियुक्तियां होती हैं। इसके बाद जिला, बलॉक और मंडलों की कार्यकारिणी भी बननी है। तीनों स्तर पर कार्यकारिणी बनने से 50 हजार से ज्यादा नेताओं को पद मिलेंगे।
    कल मंत्रियों की फीडबैक बैठक के दौरान गहलोत-पायलट के बीच विवाद का मुद्दा प्रमुखता से उठा था। कुछ मंत्रियों की राय थी कि चुनाव में जाने से पहले इस विवाद को सुलझाना जरूरी है। कई दूसरे पदाधिकारियों ने भी यह बात उठाई थी कि दोनों नेताओं के विवाद की चर्चा से ग्रासरूट स्तर तक पार्टी नेताओं, कार्यकतार्ओं के साथ जनता में भी कंफ्यूजन बना हुआ है। कई नेतरओं ने कहा था कि इससे पार्टी को नुकसान हो रहा है और आगे यह बढ़ता ही जाएगा, चुनाव में जाने से पहले विवाद नहीं सुलझा तो नुकसान तय हे। अब प्रदेश प्रभारी रंधावा ने विवाद सुलझाने का दावा किया है लेकिन राजनीतिक जानकार इसे आसान टास्क नहीं मान रहे हैं। पायलट खेमा लगातार सीएम बदलने की मांग कर रहा है। राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा से ठभ्क पहले संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने विवाद को शांत करवाया था। सीएम गहलोत ने पायलट को गद्दार तक कह दिया था।
    कांग्रेस में सर्वे के आधार पर टिकट दिए जाने का प्रावधान लागू हुआ तो कमजोर जनाधार वाले नेताओं की उम्मीदवारी पर संकट आएगा। दो बार हार चुके नेताओं को टिकट मिलना मुश्किल होगा। हालांकि हर चुनाव से पहले कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर मापदंडों में केस टू केस आधार पर छूट मिलती रही है। फीडबैक बैठकों में यह बात प्रमुखता से उठी थी कि मंत्रियों की भी टिकट काटी जानी चाहिए। 30 फीसदी मंत्रियों की टिकट काटने का सुझाव दिया गया था।