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कनाडा में बैठे गैंगस्टर ने करवाई ठेहट की हत्या:मूसेवाला मर्डर में भी शामिल; चुनाव लड़ने वाला था राजू, सिर में फंसी थी गोली

जयपुर/सीकर. गैंगस्टर राजू ठेहट की शनिवार सुबह चार बदमाशों ने पिपराली रोड पर उसके घर के बाहर ताबड़ताेड़ गोलियां मारकर हत्या कर दी। चारों शूटर कोचिंग स्टूडेंट की यूनिफॉर्म में थे। ठेहट की मौत के साथ ही राजस्थान में 18 साल पुरानी गैंगवार का तीसरा किरदार भी खत्म हो गया।

इससे पहले 23 जुलाई 2014 को बीकानेर जेल में बलबीर बानूड़ा की हत्या कर दी गई थी। वहीं, 24 जून 2017 को चूरू के मालासर में पुलिस एनकाउंटर में आनंदपाल की मौत हो गई थी।

ठेहट के मर्डर की जिम्मेदारी बीकानेर के गैंगस्टर रोहित गोदारा ने ली है। रोहित गोदारा ने ट़्वीट किया- ‘हमारे बड़े भाई आनंदपाल और बलबीर की हत्या में राजू ठेहट शामिल था। आज राजू ठेहट को मार कर हत्या का बदला ले लिया है। जल्दी ही हमारे और दुश्मनों से जल्द मुलाकात होगी। बताया जाता है कि रोहित फिलहाल कनाडा में है और वहीं उसने मर्डर की प्लानिंग की।

जय बजरंग बली।’ ट्‌वीट के बाद रोहित के घर पर पुलिस की टीम भी पहुंच गई। पुलिस ने उसके घर पर पूछताछ की। वहां पर पुलिस जाप्ता भी लगाया गया है।

2010 में हुआ था पहला हत्या का मुकदमा

रोहित अपने साथ हमेशा 4 सिक्याेरिटी गार्ड रखता है। इसके लिए दिल्ली की सिक्योरिटी एजेंसी को 1.60 लाख रुपए (एक गार्ड के 40 हजार) महीने के देता है। रोहित के खिलाफ 2010 में पहला हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था।

उसकी पत्नी ने उसके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मुकदमा 2012 में दर्ज करा दिया था। उसकी पत्नी परेशान होकर उससे अलग होकर रहने लगी। रोहित खुद वारदात करने नहीं जाता है, बल्कि गुर्गों को भेजकर वारदात कराता है।

मूसेवाला मर्डर में रोहित ने सीकर से दिलाई थी बोलेरो

रोहित गोदारा फिलहाल लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़ा हुआ है। लॉरेंस का राजस्थान में पूरा नेटवर्क रोहित ही संभाल रहा है। लॉरेंस गैंग से ही आनंदपाल का साथी बलबीर बानूड़ा का बेटा सुभाष बानूड़ा जुड़ा हुआ है। सुभाष और रोहित में भी अच्छी दोस्ती है।

रोहित गोदारा बीकानेर के लूणकरणसर का रहने वाला है। बीकानेर के कालू क्षेत्र का हिस्ट्रीशीटर है। ये माेनू और गुठली गैंग को भी संभालता है। रोहित के खिलाफ 25 से ज्यादा केस हत्या, लूट, डकैती और फिरौती के दर्ज है। रोहित की चार राज्यों की पुलिस तलाश कर रही है।

पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के मर्डर में भी रोहित का नाम सामने आया था। रोहित ने ही सीकर से मूसेवाला के शूटर को बोलेरो दिलाई थी। बोलेरो सरदारशहर (चूरू) के सवाई डेलाना गांव के महेंद्र सहारण ने सीकर से नौकर शंकर के नाम पर शपथ पत्र के जरिए खरीदी गई थी।

फरवरी में सीकर के आदित्य के नाम से खरीदी गई बोलेरो बाद में अरशद अली के नाम करा दी थी। इसे फतेहाबाद के रास्ते पंजाब में शूटर्स तक भिजवाया। रोहित ने हाल ही में जयपुर में एक बिजनेसमैन से 17 करोड़ रुपए की फिरौती भी मांगी थी।

दूध कारोबारी से बना शराब व्यापारी

राजू ठेहट क्राइम की दुनिया में आनंदपाल से पहले ही आ चुका था। साल 1995 में राजू ठेहट अपराध की दुनिया में आ गया था। ठेहट शराब के धंधे से पहले जुड़ा था। वह गोपाल फोगावट के साथ मिलकर शराब का अवैध कारोबार करने लगा था। गोपाल फोगावट के साथ काम करते हुए ही राजू ठेहट की मुलाकात बलबीर बानूड़ा से हो गई थी। बानूड़ा दूध का कारोबार करता था। राजू ठेहट के साथ मिलकर बलबीर बानूडा भी शराब के काम में जुड़ गया। बलबीर को दूध से ज्यादा शराब के काम में ज्यादा पैसा मिलने लगा था। इससे दोनों एक साथ काम करने लग गए।

एक शराब दुकान से दोस्ती दुश्मनी में बदली

राजू ठेहट और बलबीर बानूड़ा ने सीकर में 1998 में ही भेभाराम की हत्या कर डाली थी। तब से ही सीकर में गैंगवार की शुरुआत हुई। 1998 से लेकर 2004 तक दोनों साथ मिलकर शराब का कारोबार एक साथ करते रहे।

2004 में सरकार ने पहले शराब ठेकों के लिए लॉटरी सिस्टम निकाला। जीण माता इलाके की शराब दुकान राजू और बलबीर बानूड़ा को मिल गई थी। दोनों एक साथ काम करने लगे। बलबीर बानूड़ा के साले विजयपाल को दुकान पर सेल्समैन लगाया गया था। विजयपाल शराब की सेल्स का हिसाब दोनों को देता था।

हिसाब किताब को लेकर विजयपाल और राजू ठेहट के बीच में कहासुनी हो गई। राजू ने उस पर अवैध शराब बेचकर रुपए जेब में डालने का आरोप लगाया था। दोनों के बीच में झगड़ा भी हो गया था। राजू ठेहट ने विजयपाल की अपने साथियों के साथ मिलकर हत्या करा दी। यही से बानूड़ा और ठेहट की दोस्ती दुश्मनी में बदल गई। बलबीर अपने साले की हत्या का बदला लेना चाहता था।