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आरएसएस की ताकत होगी अब लगभग दोगुनी : आंबेकर

झुंझुनूं (वार्ता)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने वर्ष 2024 में अपनी शाखाओं की संख्या लगभग दोगुनी करने का संकल्प दोहराया हैं।
आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनिल आंबेकर ने आरएसएस की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक के समापन के बाद आज यहां पत्रकारों को बताया कि बैठक में संकल्प दोहराया गया कि 2024 में आरएसएस की शाखाओं की संख्या लगभग दोगुनी करनी है। फिलहाल देश में 56 हजार शाखाएं संचालित की जा रही है। जिसे एक लाख करना है। बैठक में संघ प्रमुख डॉ. मोहन भावगत ने देश के 45 प्रांतों से आए प्रांत प्रचारकों और सह प्रांत प्रचारकों से वर्षभर की गतिविधियों की समीक्षा की और आगामी कार्यक्रम को लेकर भी विचार विमर्श किया।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में आजादी के 75 साल पूरे हो रहे है। आरएसएस पूर्व से ही आजादी 75 वर्ष कार्यक्रम कर रही है। उन्होंने बताया कि इस बैठक में चर्चा की गई कि स्वाधीनता आंदोलन के मुख्य बिंदू स्व से जुड़े हुए थे। चाहे बात स्वभाषा की हो या फिर स्वदेशी या फिर स्वतंत्रता या स्वाधीनता। इसी स्व को आगे बढाते हुए आरएसएस स्वावलंबी जैसी कार्यक्रमों को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने बताया कि आजादी के आंदोलन के ऐसे छुपे हुए हीरो को आगे लाने का काम चल रहा है। जिन्होंने आजादी में अपनी महत्ती भूमिका तो अदा की लेकिन आज तक उन्हें कोई जानता नहीं है।
श्री आम्बेकर ने बताया कि आरएसएस द्वारा स्वावलंबी भारत अभियान शुरू किया गया है। समीक्षा के दौरान अच्छी चीजें सामने आई है। अब तक इस अभियान के तहत विभिन्न प्रांतों में 45 प्रशिक्षण वर्गों का आयोजन किया जा चुका है। जिसके तहत 4000 युवाओं ने संकल्प लिया है कि वे स्वावलंबी भारत अभियान को आगे बढ़ाएंगे।
उन्होंने बताया कि आरएसएस का मानना है कि स्वरोजगार से ही देश आगे बढ़ सकता है और आर्थिक समृद्धि हर व्यक्ति तक पहुंच सकती है। उन्होंने बताया कि इस अभियान में अब तक 22 संगठन जुड़े है और 200 से अधिक उद्योग इकाई भी जुड़ी है। जो युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में प्रोत्साहित करेगी। इसके अलावा इन संगठनों ने तय किया है कि 15 जुलाई से लेकर 21 अगस्त तक पूरे देश में उद्यमिता प्रोत्साहन सम्मेलन का आयोजन कर युवाओं को इस अभियान में जोड़ेंगे। जिसमें स्वयंसेवक अपना समर्थन देंगे। जरूरत पड़ने पर सहयोग भी करेंगे।
श्री आम्बेकर ने कहा कि इस तीन दिवसीय बैठक में संघ के शताब्दी वर्ष को लेकर भी चर्चा हुई है। वर्ष 2025 संघ का शताब्दी वर्ष है। इस वर्ष संघ कार्य को 100 साल पूरे हो रहे है। इसके लिए पहले भी व्यापक कार्य विस्तार योजना बनाई गई थी।