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आखिर क्यों हर साल जहरीली हो जाती है दिल्ली की हवा? मॉनसून और ठंड से कनेक्शन

नई दिल्ली
ठंड का मौसम आते ही दिल्ली एक बार फिर से ‘गैस चैंबर’ में तब्दील हो गई। लोगों को सांस लेना दूभर हो गया। चारों ओर धुंध की चादर दिखाई देने लगी। हवा में जहर घुल गया। इस बीच सियासत भी तेज हो गई और पार्टियां एक दूसरे पर आरोप मढ़ने लगीं। यह कोई पहली बार नहीं है। बीते कई सालों से हर साल दिल्ली की यही स्थिति होती है। गुरुवार को दिल्ली की हवा की क्वालिटी ‘खतरनाक’ स्तर पर पहुंच गई। 

उत्तर भारत में इन दिनों धान की फसल कटने के बाद खेतों में धड़ल्ले से पराली जलाई जा रही है। दूसरे प्रदूषकों के साथ मिलकर यह हवा को खराब कर रहा है। हवा खराब होते ही दिल्ली में सरकारी निर्माण रोक दिए गए हैं। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में डीजल से चलने वाले हल्के वाहनों के संचालन और प्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। दिल्ली में ग्रैप का स्टेज-4 लगा दिया गया है। 

आइए समझने की कोशिश करते हैं कि आखिर यह हवा हमारे लिए कैसे खतरनाक है। दरअसल हवा में खतरनाक पार्टिकल होते हैं जिन्हें पीएम 2.5 कहते हैं। ये कण बहुत ही छोटे होते हैं और हवा केसाथ हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसके बाद हमारे खून में घुल जाते हैं। गुरुवार की हालत यह थी कि प्रति क्यूबिक मीटर 588 कण हवा में मौजूद थे। डब्लूएचओ के मानक से यह 40 गुना ज्यादा था। सेंट्रल पलूशन कंट्रोल बोर्ड के मुताबिक केवल दिल्ली का यह हाल नहीं है बल्कि कई अन्य उत्तरी शहरों की भी दशा खराब है।